
जयपुर। राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन समस्त कार्यालय एवं पदस्थापित चिकित्सकों और उसके कार्यकलापों से संबंधित समस्त सेवाओं को राजस्थान अत्यावश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (रेसमा) 1970 के प्रयोजन के लिए आवश्यक सेवा घोषित कर दिया है। गौरतलब है कि सेवारत चिकित्सकों ने अपनी मांगों को लेकर 18 दिसंबर से सामूहिक अवकाश घोषित किया हुआ है। इससे पहले रेसमा लगाए जाने से अब एक बार फिर से अवकाश पर जाते ही चिकित्सकों की गिरफ्तारियां होगी।
राज्य सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की समस्त सेवाओं, कार्यालयों और उसके कार्यकलापों से संबंधित सभी सेवाओं में सामूहिक अवकाश लेने, हड़ताल पर जाने या अन्य प्रकार से चिकित्सा सेवाओं को प्रदान करने में व्यवधान किए जाने पर 17 दिसंबर तक लागू प्रतिषेध को आगामी तीन माह तक के लिये बढ़ा दिया है।
सरकार नहीं कर रही वार्ता
सेवारत चिकित्सक संघ के महासचिव डॉ. दुर्गाशंकर सैनी ने कहा कि डॉक्टर कई दिनों से शांत आंदोलन ही कर रहे हैं। लेकिन सरकार वार्ता नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को उग्र आंदोलन की परिभाषा ही समझ में आ रही है। वहीं एक बार फिर सामूहिक अवकाश की घोषणा से चिकित्सा विभाग में खलबली मची हुई है और अधिकारी सामूहिक अवकाश के दौरान वैकल्पिक इंतजामों में लगे रहे। सेवरत डॉक्टरों की ओर से अस्पतालों के बाहर टेंट लगाकर समानान्तर ओपीडी भी जारी है।
यह है सेवारत चिकित्सकों की प्रमुख मांगे
प्रदेश महासचिव डॉ.दुर्गाशंकर सैनी ने बताया कि प्रदेश में सेवारत चिकित्सकों के साथ हुए समझौते की मूल भावना के अनुरूप क्रियान्वयन किया जाए। 12 सेवारत चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश निरस्त हो, अतिरिक्त निदेशक राजपि़त्रत के पद पर सेवारत चिकित्सक लगाया जाए, सामूहिक अवकाश अवधि को अवकाश में समायोजित करने, सेवारत चिकित्सकों के आंदोलन के दौरान चिकित्सकों के खिलाफ दर्ज प्रकरण व अनुशासनात्मक कार्यवाही के आदेश निरस्त करने की मांग की गई है।
Published on:
14 Dec 2017 07:11 pm
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