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‘पापा…अब शायद बात न हो’, रूस-यूक्रेन युद्ध में धकेला जयपुर का युवक, माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल, अक्टूबर से नहीं हुई बात

Jaipur's Manoj Singh Shekhawat: जयपुर के एक परिवार के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध एक बड़ा दुख लेकर आया है। विक्रम सिंह शेखावत का बेटा मनोज जो रूस में नौकरी करने गया था, अब युद्ध क्षेत्र में फंसा हुआ है।

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मनोज सिंह शेखावत (फोटो: पत्रिका)

Rajasthani Student In Russia-Ukraine War: साहब! बस मेरा बेटा जिंदा वापस आ जाए…ये कहते-कहते जयपुर झोटवाड़ा के गोकुलपुरा के करणी विहार निवासी विक्रम सिंह शेखावत की आंखें भर आती हैं। बेटे मनोज सिंह शेखावत की आखिरी आवाज 9 अक्टूबर को मोबाइल पर आई थी। उसने कहा था पापा, शायद यह मेरा आखिरी मैसेज हो…हमें फ्रंटलाइन युद्ध क्षेत्र में भेजा जा रहा है। इसके बाद 15 अक्टूबर से मनोज का कोई पता नहीं है। पिता अब हर दफ्तर, हर चौखट पर बेटे को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

4 लाख लेकर रूस में नौकरी लगाने का दिया था झांसा

परिवार का आरोप है कि दादी का फाटक, मुरलीपुरा निवासी शंकर सिंह, रतनगढ़ चूरू के प्रेम नगर निवासी राजेश चौधरी और आरएचबी कॉलोनी, हनुमानगढ़ निवासी राकेश यादव ने रूस में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर मनोज से चार लाख रुपए लिए। बाकायदा एग्रीमेंट किया गया। कहा गया कि ई-वीजा पर रूस भेजेंगे और वहां पहुंचते ही वर्किंग वीजा और ग्रीन कार्ड दिलवा दिया जाएगा।

कभी टमाटर तो कभी अंडा फैक्ट्री में लगाया

मनोज रूस पहुंचा तो सपना टूटने लगा। पहले उसे अंडा निर्माण फैक्ट्री में 15 दिन काम करवाया गया। एक रुपया भी नहीं मिला। फिर टमाटर तोड़ने की फैक्ट्री में भेज दिया गया, वहां भी मजदूरी नहीं दी गई। स्थायी नौकरी तो दूर, किसी कंपनी ने पहचान तक नहीं दी। ई-वीजा की मियाद खत्म हुई और एजेंटों ने मनोज को वहीं अकेला छोड़ दिया।

डर, भूख और बेबसी के बीच फंसा मनोज

परिजनों के मुताबिक इसी दौरान कुचामन निवासी जीतू बोचालिया संपर्क में आया, जिसे एजेंटों का आदमी बताया गया। जीतू ने जेल जाने का डर दिखाकर बंकर खोदने जैसे खतरनाक काम में लगाने की कोशिश की। मनोज ने साफ मना किया और भारत लौटने की गुहार लगाई। लेकिन एजेंटों ने फोन कर कहा कि जीतू ही सब संभालेगा।

आरोप है कि इसके बाद जीतू ने रूसी भाषा में बात कर मनोज को यूक्रेन बॉर्डर भेज दिया। वहां 15 दिन की ट्रेनिंग करवाई गई और 17 सितंबर से उसे यूक्रेन के लोहनस्क इलाके में हथियारों की ट्रेनिंग दी जाने लगी। यह इलाका फ्रंटलाइन युद्ध क्षेत्र से महज तीन किलोमीटर दूर बताया जा रहा है।

पापा, अब शायद बात न हो पाए…

9 अक्टूबर को मनोज का संदेश आया कि हमें दो-दो के दल में पूरी बटालियन के साथ फ्रंटलाइन भेजा जा रहा है। आगे संपर्क नहीं हो पाएगा। इसके बाद से घर में सन्नाटा है। मां हर आहट पर चौंक जाती है, पिता फोन की स्क्रीन ताकते रहते हैं। 15 अक्टूबर के बाद से मनोज का फोन बंद है।

मानव तस्करी का आरोप

परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि मानव तस्करी का मामला है। नौकरी के नाम पर युवकों को युद्ध क्षेत्र में झोंक दिया जा रहा है। विक्रम सिंह शेखावत ने सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे को सुरक्षित भारत लाया जाए और दोषी एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि किसी और पिता को अपने बेटे की आखिरी आवाज सुनने का दर्द न झेलना पड़े।

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