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वेद मंत्रों की गूंज में 41 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, राजस्थान संस्कृत अकादमी का दीक्षांत समारोह, 37 वेद विद्यालय हुए शामिल

राजस्थान दिवस महोत्सव के तहत राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हुआ।

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जयपुर। राजस्थान दिवस महोत्सव के तहत राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हुआ। शास्त्री नगर स्थित क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र एवं विज्ञान पार्क में पहली बार आयोजित दीक्षांत एवं सम्मान समारोह में प्रदेशभर के 37 वेद विद्यालयों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में कुल 41 विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। वैदिक परंपरा के अनुरूप मंत्रोच्चार और यज्ञ-हवन के बीच कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

वैदिक परंपरा को बढ़ावा देने की पहल

अकादमी की निदेशक डॉ. लता श्रीमाली ने बताया कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा और विभागीय मार्गदर्शन में यह आयोजन ‘एक कदम भारतीय संस्कृति की ओर’ अभियान के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि उद्देश्य नई पीढ़ी में वैदिक अध्ययन को लोकप्रिय बनाना और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय स्तर की तरह सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाना है। उन्होंने यह भी बताया कि समारोह से एक दिन पहले 16 मार्च को वेद अध्यापकों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें शुक्ल यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।

बालिकाओं के मंत्रोच्चार ने बांधा समां

समारोह का मुख्य आकर्षण मोहरी देवी तापड़िया संस्कृत बालिका वेद विद्यालय की छात्राएं रहीं। पहली बार शामिल हुई इन छात्राओं ने एक समान वेशभूषा में सस्वर वेद पाठ और यज्ञ-हवन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके मंत्रोच्चार से पूरा परिसर वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान हो उठा। वहीं अन्य वेद विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी चारों वेदों का सामूहिक पाठ कर उपस्थित जनसमूह को आकर्षित किया।

गुरु-शिष्य परंपरा को जीवित रखना जरूरी

मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि वेदों का संरक्षण केवल पुस्तकों से संभव नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवित रखने से ही यह धरोहर सुरक्षित रह सकती है। उन्होंने ‘बाल शंकराचार्य’ सम्मान पाने वाले विद्यार्थियों को भविष्य का धर्म रक्षक बताते हुए कहा कि संस्कृत और वेदों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने अकादमी के इस प्रयास को मील का पत्थर बताया।

मेधावी छात्रों और संस्थाओं का सम्मान

समारोह में पंचम वर्ष की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ‘बाल शंकराचार्य’ सम्मान दिया गया। साथ ही नि:शुल्क वैदिक संस्कार शिविर आयोजित करने वाली संस्थाओं और प्रशिक्षकों को ‘वैदिक संस्कार सम्मान’ से नवाजा गया। कार्यक्रम का आयोजन सेठ श्री सूरजमल तापड़िया आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, जसवंतगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर प्रो. राजेंद्र प्रसाद शर्मा, डॉ. नरोत्तम पुजारी, राकेश कुमार नेहरा, श्यामसुंदर शर्मा और कौशलेंद्र शास्त्री, डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा सहित कई वैदिक विद्वान मौजूद रहे।

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