
kids corner
अनोखा कुआं और सोने का पानी
परिधि शेखावत
उम्र 10 साल
एक दिन अंकुश और रिया नाम के दो पक्के दोस्त टहलते हुए नई राह पर निकल पड़े। वे बातें करते हुए घर से दूर एक कच्ची सड़क पर पहुंचे, जहां कुछ दूर जाने पर एक पहाड़ आता था। वहां उन्हें एक पहाड़ी पर कुआं दिखा। वे पहले से बाल्टी में पानी लाए थे, पर नया पानी भरने के लिए उन्होंने उसे गिरा दिया। जब रिया ने कुएं से पानी निकाला तो उसमें कीड़े थे, इसलिए उन्होंने वह पानी फेंक दिया और खाली बाल्टी लेकर आगे बढ़ गए।
आगे उन्हें एक और पहाड़ी पर दूसरा कुआं मिला जिसका पानी बहुत साफ था। अंकुश को बहुत प्यास लगी थी, इसलिए दोनों ने वह पानी पिया। वहीं पहाड़ी के पीछे उन्हें एक कागज मिला जिस पर लिखा था कि मंत्र बोलो और पानी के बदले सोना ले लो। इसे देखकर वे दोनों हंसने लगे कि किसी बेवकूफ ने इसे यहां फेंक दिया है।
इसके बाद वे वापस पहले वाले कुएं के पास आकर बैठ गए क्योंकि उनके पैर दुख रहे थे। वहां बैठे हुए अंकुश ने मंत्रों का खेल खेलने की बात कही। रिया ने खेल शुरू किया और अपनी बाल्टी का पानी पीते हुए मंत्र बोला के अकरम बकरम। तभी चमत्कार हुआ और बाल्टी का पानी सोने में बदल गया। यह देख दोनों दौड़कर घर पहुंचे और अपने माता-पिता को सोना दिखाया। मम्मी-पापा ने कहा कि यह बहुत कीमती सोना है और इसे आधा-आधा बांट लेते हैं। रिया तुरंत शॉपिंग करने की बात कहने लगी जिसे सुनकर सबकी मम्मी हंस पड़ीं। सोना देने के बाद दोनों दोस्त फिर से खेलने निकल गए।
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नीनू मीनू का बगीचा
अधिक मीना
उम्र 13 वर्ष
एक दिन नीनू और मीनू स्कूल से लौटते हुए गांव के पास बने एक छोटे से बगीचे में चले गए। जैसे ही उन्होंने बगीचे में कदम रखा, उनकी आंखें चमक उठीं। चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे , लाल गुलाब, गेंदा, सफेद चमेली और गुलाबी गुड़हल। नीनू ने खुश होकर कहा, मीनू, देखो! कितने सुंदर फूल हैं, जैसे किसी ने धरती पर रंग बिखेर दिए हों। मीनू भी खुशी से उछल पड़ी और बोली, भैया, ये फूल तो मुस्कुरा रहे हैं, जैसे हमें देखकर खुश हो गए हों।
दोनों भाई-बहन फूलों के पास जाकर उन्हें ध्यान से देखने लगे। हवा चलती तो फूल हल्के-हल्के हिलने लगते, जैसे कोई गीत गा रहे हों। उनकी खुशबू से पूरा बगीचा महक रहा था। मीनू ने धीरे से एक फूल को छूते हुए कहा, भैया, इन्हें तोड़ना नहीं चाहिए, ये पौधों पर ही अच्छे लगते हैं। नीनू ने सिर हिलाकर कहा, हां मीनू, अगर हम इन्हें यहीं रहने देंगे तो ये और भी लोगों को खुश करेंगे। फिर दोनों ने बगीचे में पड़े सूखे पत्ते उठाकर एक जगह रख दिए, ताकि बगीचा साफ-सुथरा रहे। जाते-जाते उन्होंने पौधों को प्यार से देखा। घर लौटते समय दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी। फूलों ने जैसे उनके मन में भी खुशियों की खुशबू भर दी थी।
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नन्हे प्रकृति प्रेमी
कौशल टाक
उम्र 10 वर्ष
रविवार का दिन था। मोनू और रिया दोनों भाई बहन अपने घर के बाहर खेल रहे थे। तभी मोनू की नजर अपने आस पास के पेड़ पौधों पर पड़ी जो कुछ दिन पहले दोनों भाई बहन ने मिलकर लगाए थे। अचानक मोनू बोला "रिया होली की मस्ती में हम तो अपने पौधों को संभालना ही भूल गए । देखो पौधे पानी के बिना मुरझा गए हैं" रिया ने भी मोनू की बात स्वीकार करते हुए कहा "हां भाई और इस बार तो गर्मी भी जल्दी आ गई " और फिर दोनों पास वाले कुएं से बाल्टी भर भर कर पौधों को पानी देने लगे। पानी पीकर पौधे खुश हो गए और पौधों को देखकर दोनों भाई बहन बहुत खुश हुए।
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मदद की खुशी
समृद्धि शर्मा
उम्र 10 वर्ष
एक दिन राहुल और राधा खेलने के लिए खेतों की ओर गए। रास्ते में उन्हें एक पुराना कुआं दिखाई दिया। दोनों बहुत खुश हुए और सोचा कि यहां पानी देखेंगे। राधा ने एक बाल्टी उठाई और राहुल के साथ मिलकर कुएं के पास गई। दोनों ने मिलकर बाल्टी को कुएं में डाला और पानी निकालने लगे। थोड़ी मेहनत के बाद बाल्टी में ठंडा पानी भर गया। तभी उन्होंने देखा कि पास में एक प्यासा कौआ बैठा है। राधा ने थोड़ा पानी जमीन पर डाल दिया ताकि कौआ पानी पी सके। कौए ने पानी पिया और उड़ गया। राहुल और राधा को बहुत खुशी हुई कि उन्होंने एक प्यासे पक्षी की मदद की। फिर दोनों बाल्टी लेकर घर की ओर लौट गए।
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सपनों की उड़ान और मेहनत
निहारिका कसवान
उम्र 12 वर्ष
रोहन और रिया, दोनों ही अच्छे दोस्त थे। एक दिन, उन्होंने एक चित्र देखा जिसमें दो बच्चे हाथ में हाथ डालकर पढ़ाई कर रहे थे। रोहन ने कहा, "चलो, हम भी एक दूसरे की पढ़ाई में मदद करें और अपने स्कूल में एक 'स्टडी ग्रुप' शुरू करें! रिया ने कहा, और हम अपने स्कूल में एक 'हेल्पिंग हैंड' क्लब भी शुरू करेंगे, जहां हम बुजुर्गों की मदद करेंगे और बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे!
रोहन और रिया ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर शहर में अच्छे काम करने शुरू किए। उन्होंने बुजुर्गों को पढ़ाया, बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया, और अपने स्कूल में पढ़ाई में मदद की। इस दौरान, उन्होंने सीखा कि पढ़ाई और मेहनत से हम अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। रिया ने कहा, पढ़ाई सिर्फ अच्छे मार्क्स लाने के लिए नहीं है, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए है! रोहन ने कहा और हमें अपने डिसिप्लिन और आत्मविश्वास को भी बढ़ाना होगा, ताकि हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकें!रोहन और रिया को उनके अच्छे कामों के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने सीखा कि पढ़ाई, मेहनत, और आत्मविश्वास से हम अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं और समाज को बेहतर बना सकते हैं।
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एकता की शक्ति
नाम : नमस्या सिंह
उम्र: 12 वर्ष
रमन और नेहा दोनों मित्र थे दोनों एक साथ खेलते थे लेकिन एक दिन उन दोनों में झगड़ा हो गया और दोनों एक दूसरे से नाराज हो गए और दोनों अलग-अलग खेलने लगे तभी तेज गर्मी होने के कारण दोनों को प्यास लग आई लेकिन दोनों एक दूसरे से नाराज थे और पास में एक कुआं था तभी दोनों अलग-अलग पानी निकालने लगे , मगर सफल नहीं हुए। अब उन्हें भी यह समझ आ गया था, कि वे यह काम अकेले नहीं कर सकते और दोनों ने फिर से मित्रता करने का निर्णय लिया और दोनों ने एक साथ मिलकर कुएं से पानी निकालने में सफल हुए । मिलकर कार्य करने से कठिन कार्य भी सफल हो जाते हैं ।
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छोटा सा अच्छा काम
नाम : जैनाब
एक दिन सुबह-सुबह आरव और उसकी दोस्त रानी गाँव के बाहर घूमने निकले। मौसम बहुत सुहावना था। चारों तरफ हरियाली थी और पक्षियों की मधुर आवाज़ सुनाई दे रही थी। दोनों के हाथ में एक छोटी टोकरी थी। वे रास्ते में चलते-चलते फूल और फल इकट्ठा कर रहे थे, चलते-चलते वे एक छोटी पहाड़ी के पास पहुंचे। वहां एक पुराना कुआं था और उसके पास एक छोटा सा पौधा लगा हुआ था। वह पौधा मुरझाया हुआ लग रहा था। रानी ने उसे देखकर कहा, “लगता है इस पौधे को पानी की जरूरत है।”
आरव ने तुरंत कहा, “चलो, हम कुएं से पानी निकालकर इसे पानी देते हैं।” दोनों ने मिलकर कुएं से पानी निकाला और उस पौधे को पानी दिया। फिर वे खुशी-खुशी घर लौट आए।
कुछ दिनों बाद वे फिर उसी जगह गए। इस बार वह छोटा सा पौधा हरा-भरा हो चुका था और उस पर सुंदर फूल खिल गए थे। यह देखकर आरव और रानी बहुत खुश हुए। उन्हें लगा जैसे प्रकृति ने उनके छोटे से अच्छे काम का धन्यवाद किया हो। दोनों ने समझ लिया कि अगर हम प्रकृति की देखभाल करें, तो प्रकृति भी हमें खुशी देती है।
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पर्यायवर्ण की रक्षा
नाम- छवि
उम्र - 10 वर्ष
एक बार की बात है, दो भाई - बहन थे, छवि और भव्य | जब भी वे अपने नाना जी के घर जाते, तो कुए मे से पानी भरकर पेड़ - पौधों मे पानी डालते |ऐसा रोज करने पर, हरियाली बढ़ गई, और पेड़- पौधे बड़े होने लगे, उन्होंने सीखा की पर्यायवरण मे ही हमारी खुशी है।
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अनोखी सीख
नाम- खुश नाहटा
उम्र -7 वर्ष
मोनू और मैत्री की स्कूल की छुट्टियां हो चुकी थी। वो अपना अधिकतर समय मोबाइल पर बिताते। आखिर उनके मम्मी पापा ने उन्हें गांव में उनके दादा दादी के पास भेजा।
दादा दादी के साथ दोनों गांव में घूमते, गायों की देखभाल करते, रात को परियों की कहानी सुनते। धीरे धीरे दोनों का मन गांव के वातावरण में लग गया।
पर एक बात उनके मन को कचोटती।
गांव की जमीन बंजर थी। दोनों ने दादा दादी से इस बारे में बात की। तब उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन में उन्होंने जमीन में अनेक बीज बोए। सिंचाई के लिए दूर कुएं से पानी ले आते। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। कुछ ही दिनों में पौधे, फूल उग आये, चारों ओर हरियाली छा गई। दोनों बहुत खुश हुए।
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एकता ओर साहस
नाम- कोमल अचरा
उम्र - 13 वर्ष
एक समय की बात है एक प्यारा सा गांव था ' हंसपुर ', जो ऊंची पहाड़ियों की गोद में बसा था| उसी गांव में दो घड़े दोस्त रहते थे - चिंटू और संगीता| दोनों के बीच ऐसी पक्की दोस्ती थी कि गांव वाले उन्हें राम लखन की जोड़ी कहते थे|
एक बार गर्मियों के मौसम में गांव का मुख्य क्या सुख गया और सारे पेड़ पौधे सूखने लगे| हो लोग पानी भरने गांव के एक पुराने बगीचे में स्थित एक चट्टान पर बने हुए कुएं पर जाते | एक दिन चिंटू और संगीता भी उस बगीचे म गए तो उन्होंने रस्ते में कई पेड़ पौधों किलो देखा जिंगल पानी की बहुत ज्यादा जरूरत थी| तो चिंटू अपने घर से एक बाल्टी लाया ओर दोनों ने कुएं से पानी निकाला| बाल्टी में वजन ज्यादा होने के कारण दोनों ने बाल्टी का एक एक सिरा पकड़ लिया और रास्ता पथरीला और कठिन था धूप भी तेज थी लेकिन दोनों के हौसले उनसे भी ऊंचे थे| और उन्होंने पेड़ पौधों में पानी देने लगे| उस दिन के बाद वे रोज उस बगीचे में आते और रोज पेड़ पौधों में पानी देते धीरे धीरे पौधे हरे भरे हो गए उनमें नई पत्तियां आ गई, नए फूल आ गए ओर कुछ पेड़ो के फल भी लग गए जो चिंटू और संगीता मजे से खाते| चिंटू और संगीता तो बस पेड़ पौधों में न केवल पानी डालते उन्होंने यह भी साबित भी करा दिया कि अलग एकता ओर साहस तो कोई भी मुश्किल आसानी से ताली जा सकती है|
शिक्षा:- सच्ची मित्रता और टीम वर्क से हम बड़ी से बड़ीउसकिल को भी पार कर सकते है|
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राजू और रीना की दोस्ती
मैत्री
11 साल
एक बार की बात है,एक लड़का था जिसका का नाम राजू था l वह रोज़ पानी लेने कुंआ के पास जाता था l उसकी बाल्टी जिसमे वह पानी लेने जाता था बहुत भारी होती थी l एक दिन,एक लड़की जिसका का नाम रीना था,राजू को देखा। उसे राजू पर दया आई l वह राजू के पास गई और पूछा,"क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं ?"राजू ने हां बोला l तब रीना ने बाल्टी उठाने में साथ दिया l वे दोनों घर पहुंच गए l राजू ने रीना को धन्यवाद बोला l रीना ने पूछा ,"क्या तुम "दोस्ती करोगे?"राजू ने हाँ बोला l
रीना और राजू सबसे अच्छे दोस्त हो
गए l
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हिम्मत नहीं हारो!
नाम- सिद्धी शर्मा
उम्र- 8 वर्ष
बहुत समय पहले की बात है। गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। दो बच्चे अपने परिवार के साथ गांव में छुट्टियां मनाने आए थे। वे दोनों बच्चे टहलते-टहलते एक कुएं के पास आ पहुंचे। उनकी इच्छा थी कि वे कुएं से पानी भरें और घर ले जाएं। वे बच्चे भागकर कुएं के पास गए और कुएं से पानी भरने लगे।
पानी भरने के बाद जब वे उसे घर ले जा रहे थे, तब आधे रास्ते में ही उनकी बाल्टी एक बड़े पत्थर से टकरा गई। जब बाल्टी नीचे गिरी तब उसमें से सारा पानी जमीन पर फैल गया। बच्चे खड़े हुए और फिर से पानी भरने गए। इस बार भी ऐसा ही हुआ। अब वे नई उम्मीद के साथ गए।
इस बार उन्होंने बाल्टी को ध्यान से पकड़ा। इस बार उनकी बाल्टी नहीं गिरी। वे दोनों उसे खुशी-खुशी घर ले गए।
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अनजाने से बेस्ट फ्रेंड्स तक
नाम - नीरवी विश्नोई
उम्र - 11 साल
एक छोटी लड़की पहाड़ी पर चढ़कर अपने गरीब परिवार के लिए पानी लाती थी। एक लड़का अपने अमीर परिवार के साथ वहां शिफ्ट हो गया। लड़की उससे दोस्ती करना चाहती थी, लेकिन डरती थी। लड़के को भी दोस्ती करने की इच्छा थी, लेकिन उसे भी डर था। एक दिन, लड़की भारी बाल्टी उठाकर परेशान थी। लड़के ने मदद की। लड़की ने धन्यवाद कहा और घर भाग गई। लेकिन लड़के ने हर रोज मदद की। धीरे-धीरे वे अच्छे दोस्त बन गए और साथ खेलने लगे।
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भाई बहन का प्यार
नाम- रेयांश सुमन सैनी
उम्र- 11
राहुल और मोना रास्ते में कहीं जा रहे थे तो उन्होंने कुछ दूरी पर एक जगह कुछ पौधों को मुरझाते हुए देखा, पौधों को इस हालत में देकर उन्हें बहुत बुरा लग रहा था वह सोच रहे थे कि किस तरह इन पौधों को पानी पिलाया जाए तभी उनकी नजर दूर पहाड़ी पर बने हुई कुए पर पड़ी, दोनों ने उस पहाड़ी पर बने कुएं से पानी लाने का सोचा और इधर-उधर देखा तो उन्हें एक बाल्टी नजर आई । दोनों उस बाल्टी को लेकर पहाड़ पर चढ़ने लग गए। धूप बहुत तेज थी और पहाड़ भी ऊंचा था पर दोनों ने हार नहीं मानी और बाल्टी में पानी भरकर नीचे ले आए और पौधों को पानी पिलाया, पानी पिलाने के बाद पौधे फिर से खिल उठें। जिसे देखकर राहुल और मोना भी खुश हो गए क्योंकि आज उन्होंने एक दूसरे के साथ के कारण अच्छा काम किया था।
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जैक और जिल की कहानी
नाम- मुस्तफा राजा शेख
उम्र- 8 वर्ष
यह कहानी जैक और जिल नाम के दो बच्चों की है जैक और जिल एक बाल्टी में पानी लेने के लिए पहाड़ी पर चढ़ते हैं जैक का पैर फिसल जाता है जिससे उसके सिर पर चोट लग जाती है जिल भी संतुलन खो देती है और उसके पीछे-पीछे गिर जाती है दोनों के चोट लगने के बाद भी वह फिर से उठे और घर की ओर बढ़े ।
यह कहानी बच्चों को साहस और गलतियों से सीखने का संदेश देती है और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
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Published on:
17 Mar 2026 06:48 pm
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