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किड्स कॉर्नर: चित्र देखो कहानी लिखो 68 …. बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (25 फरवरी 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 68 में भेजी गई कहानियों में भव्य दशोरे, देवांशी सोखल और अदिति कौशिक: प्रथम, द्वितीय और तृतीय विजेता रहे। इनके साथ सराहनीय कहानियां भी दी जा रही हैं।

नन्हा रक्षक और जादुई टिड्डाइवांशी चाहर ,उम्र 6वर्षएक बार एक छोटा बच्चा घर से बाहर खेलते-खेलते एक रंग-बिरंगी तितली का पीछा करने लगा। वह तितली के पीछे इतना मग्न हुआ कि उसे पता ही नहीं चला कि वह कब दूर एक तालाब के किनारे पहुंच गया। जब उसे घर की याद आई, तो वह रास्ता […]

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जयपुर

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Tasneem Khan

Mar 05, 2026


नन्हा रक्षक और जादुई टिड्डा
इवांशी चाहर ,उम्र 6वर्ष
एक बार एक छोटा बच्चा घर से बाहर खेलते-खेलते एक रंग-बिरंगी तितली का पीछा करने लगा। वह तितली के पीछे इतना मग्न हुआ कि उसे पता ही नहीं चला कि वह कब दूर एक तालाब के किनारे पहुंच गया। जब उसे घर की याद आई, तो वह रास्ता भूल चुका था और डरने लगा। अचानक उसे एक विशाल और जादुई टिड्डा दिखाई दिया, जिसके पीछे एक भूखा चूहा उसे मारने के लिए दौड़ रहा था। बच्चे ने तुरंत फुर्ती दिखाई और टिड्डे की पीठ पर सवार हो गया। उसने पास पड़ी एक सूखी लकड़ी को चाबुक की तरह हवा में लहराया, जिससे टिड्डा डरकर इतनी तेज़ भागा कि चूहा बहुत पीछे छूट गया। टिड्डे की जान बच गई। उसने बच्चे को धन्यवाद देते हुए पूछा, प्यारे बच्चे, तुमने मेरी जान बचाई है। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए। बच्चे ने अपनी परेशानी बताई कि वह घर का रास्ता भूल गया है। जादुई टिड्डे ने मुस्कुराते हुए पलक झपकते ही बच्चे को उसके घर पहुंचा दिया। बच्चा बहुत खुश हुआ और टिड्डे का आभार माना।

श्रेष्ठता का सम्मान
कृशिव ,उम्र 11वर्ष
प्राचीन समय में, एक नगर में मूषक महाराज नाम का एक विशालकाय और निष्ठावान चूहा रहता था। वह राजा का प्रिय सिपाही था। उन दिनों नगरवासी 'कालू चोर' से बहुत परेशान थे, जो अपने मित्र मधुमक्खी पर सवार होकर पलक झपकते ही चोरी कर उड़ जाता था। एक दिन कालू ने मूषक महाराज का नन्हा हाथी चुरा लिया। मूषक ने तुरंत अपनी तलवार निकाली और पीछा कर उसे धर दबोचा। राजा ने न्याय करते हुए लूटा हुआ सामान प्रजा में बांट दिया और चोर को सजा के रूप में खेती का काम सौंपा। मूषक महाराज की वीरता और सूझबूझ देख राजा ने उन्हें 'विशेष मंत्री' के पद से सम्मानित किया।

सच्चा रक्षक और एकता की जीत
लक्ष्य ,उम्र 10 वर्ष
एक घने जंगल में एक बहादुर रक्षक रहता था, जिसका धर्म नन्हे जीवों की सुरक्षा करना था। वह अपने तेज-तर्रार टिड्डे पर सवार होकर रोज जंगल का निरीक्षण करता था। उसके पास एक मजबूत रस्सी थी, जिससे वह पल भर में जाल बुन लेता था। एक दिन उसने देखा कि एक शिकारी बिल्ली एक डरे हुए चूहे का पीछा कर रही है। पास ही एक चींटी भी यह सब देख रही थी। रक्षक ने तुरंत अपनी रस्सी घुमाकर बिल्ली के सामने फेंकी, जिससे वह लड़खड़ा गई। उसी समय साहसी चींटी ने बिल्ली के पैर पर ज़ोर से काट लिया। बिल्ली घबराकर रस्सी के जाल में उलझ गई और चूहे की जान बच गई। चूहे ने रक्षक और चींटी का आभार माना। तब रक्षक ने मुस्कुराते हुए कहा, सच्ची बहादुरी दूसरों की मदद करने और मिल-जुलकर रहने में ही है।

साहसी उड़ान और जादुई सफर
अद्विता शर्मा , उम्र 13 वर्ष
एक बार की बात है, एक निडर लड़की ने एक विशालकाय जादुई कीड़े को अपना मित्र बना लिया। वह कीड़ा इतना विशाल था कि उस पर बैठकर बादलों की सैर करना संभव था। लड़की ने उसकी पीठ पर एक सुंदर गुलाबी मखमली कपड़ा बांधा और पूरे उत्साह के साथ आसमान में उड़ चली। तभी, नीचे से एक घमंडी चूहा हाथ में चमकती तलवार लिए उसका पीछा करने लगा। चूहे की आंखों में गुस्सा था और वह लड़की को रोकना चाहता था। लेकिन लड़की घबराई नहीं उसने अपनी बुद्धिमत्ता और फुर्ती से कीड़े को नियंत्रित किया और उसे और ऊंचा उड़ा ले गई। चूहा जमीन पर भागता रह गया, पर उनकी ऊंचाई तक नहीं पहुंच सका। आसमान से पेड़, घर और नदियां खिलौनों जैसी छोटी लग रही थीं। लड़की को अपनी हिम्मत पर गर्व हो रहा था। अंत में, कीड़े ने एक सुरक्षित मोड़ लिया और उसे कुशलता से जमीन पर उतार दिया। हार मानकर चूहा पीछे हट गया। लड़की ने अपने जादुई मित्र को सहलाकर धन्यवाद दिया। वह जान गई थी कि साहस और सूझबूझ से किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है।

बहादुर मूषक और जादुई जंग
प्रवीण कुमार , उम्र 10 वर्ष
एक सुंदर उपवन के कोने में चूहों का एक शांत और सुखी साम्राज्य था। एक दिन अचानक, वहां एक शरारती बौना अपने विशालकाय यांत्रिक झींगे पर सवार होकर आ धमका। वह अपनी जादुई चाबुक लहराकर चूहों को डराने लगा और उनके भोजन के भंडार पर कब्जा करने की कोशिश करने लगा। चूहों की सेना के निडर सेनापति 'वीरू' ने हार नहीं मानी। उसने तुरंत अपनी नन्ही तलवार निकाली और एक ऊंची छलांग लगाकर उस विचित्र यांत्रिक जीव का रास्ता रोक लिया। वीरू दहाड़ा, सावधान तुम हमारे घर को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। बौना चकित रह गया उसने सोचा भी नहीं था कि इतना छोटा सा जीव उसका मुकाबला करेगा। वीरू की बहादुरी देख बाकी चूहे भी अपनी सुरंगों से बाहर निकल आए। सबने मिलकर ऐसी धूल उड़ाई और युद्धघोष किया कि बौना और उसका यांत्रिक जीव घबरा गए। अंतत में बौने को अपनी हार माननी पड़ी और वह वहां से दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।

जग्गू चूहा और जादुई तलवार
देवांश भंडारी ,उम्र - 11 वर्ष
लल्लनपुर के पास एक घने जंगल में जग्गू चूहा रहता था। उसके पास उसके दादाजी की दी हुई एक अनमोल सोने की तलवार थी। जग्गू के दादाजी ने इसी तलवार से कई बार जंगल के दुश्मनों का सामना किया था और जग्गू को इसकी रक्षा करने की सीख दी थी। एक दिन, एक लालची बौना जादूगर अपने विशाल टिड्डे पर सवार होकर वहां आ पहुंचा। उसे कहीं से इस सोने की तलवार का पता चल गया था। वह उस कीमती तलवार को बेचकर अमीर बनना चाहता था। उसने जग्गू को कई तरह के लालच दिए और डराने की भी कोशिश की, लेकिन जग्गू टस से मस न हुआ। जब जादूगर और उसके टिड्डे ने हमला करना चाहा, तो जग्गू ने जैसे ही अपनी पुश्तैनी तलवार उठाई, उसमें अद्भुत शक्ति आ गई। जग्गू को शेर की तरह दहाड़ते देख बौना जादूगर और टिड्डा डर के मारे कांपने लगे। जग्गू उनके पीछे तलवार लेकर दौड़ा और चिल्लाया,भाग जाओ यहां से, वरना खैर नहीं। दोनों जान बचाकर दुम दबाकर भागे और बोले, पैसा फिर कमा लेंगे, पहले जान बचाओ।

बहादुर चिंटू और शरारती चूहा
कुंजिका मेहता ,उम्र 8 वर्ष
एक हरे-भरे खेत के किनारे चिंटू नाम का एक निडर बालक रहता था। चिंटू को प्रकृति और जीवों से गहरा लगाव था। एक सुनहरी दोपहर, वह अपने विशाल टिड्डे मित्र की पीठ पर सवार होकर खेतों की सैर का आनंद ले रहा था। अचानक झाड़ियों के पीछे से एक शरारती चूहा हाथ में एक छोटी सी चमकदार दरांती लेकर रास्ता रोक खड़ा हुआ। वह कड़कती आवाज़ में बोला, ठहरो यह मेरा इलाका है, यहां से आगे बढ़ना मना है।नन्हा टिड्डा तो सहम गया, लेकिन चिंटू तनिक भी नहीं डरा। उसने शांत भाव से पूछा, नन्हे चूहे भाई, इतनी सुंदर दोपहर में इतना क्रोध क्यों। हम तो बस प्रकृति का आनंद ले रहे हैं। चूहा अपनी दरांती चमकाते हुए बोला, मुझे किसी का दखल पसंद नहीं। चिंटू ने मुस्कुराते हुए समझाया, दोस्ती में जो सुख है, वह दुश्मनी में कहां। अकेले रहने से अच्छा है कि हम साथ मिलकर खेलें। चिंटू की सौम्यता और टिड्डे की फुर्तीली छलांग देख चूहे का घमंड चूर हो गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने दरांती नीचे रख दी। वह शर्मिंदा होकर बोला, मुझे क्षमा कर दो, क्या मैं भी तुम्हारा मित्र बन सकता हूं। उस दिन के बाद से चिंटू, टिड्डा और चूहा अटूट मित्र बन गए और साथ मिलकर पूरे खेत की रखवाली करने लगे।

रमेश और जादुई चींटी
आयुष सियाग ,उम्र 11 वर्ष
एक समय की बात है, रमेश नाम का एक साहसी और जिज्ञासु बालक जंगल की सैर पर निकला। चलते-चलते वह एक रहस्यमयी स्थान पर पहुंचा, जहां उसकी भेंट एक विशालकाय जादुई चींटी से हुई। वह चींटी न केवल विशाल थी, बल्कि मनुष्यों की तरह बोल भी सकती थी। रमेश और चींटी में तुरंत मित्रता हो गई। रमेश उसकी मजबूत पीठ पर सवार हुआ और जादुई चींटी उसे जंगल के अद्भुत नज़ारे दिखाने के लिए पवन की गति से दौड़ने लगी। तभी झाड़ियों में छिपे एक दुष्ट चूहे की नज़र उन पर पड़ी। चूहा लकड़ी का धनुष-बाण लेकर रमेश को पकड़ने के इरादे से उनके पीछे भागा। चूहे ने कई बाण चलाए, लेकिन जादुई चींटी बहुत ही फुर्तीली थी। वह ऊंचे-नीचे पत्थरों और कंटीले रास्तों पर इतनी तेजी से मुड़ी कि चूहा हांफने लगा। अंत में, चूहा थक-हारकर बीच रास्ते में ही बैठ गया। अपनी जादुई मित्र की मदद से रमेश सुरक्षित घर लौट आया। उस दिन उसने सीखा कि केवल साहस ही नहीं, बल्कि सही समय पर बुद्धि और सही मित्र का साथ भी ज़रूरी है।

बुद्धिमान चूहा
यश टांक ,उम्र 11 वर्ष
एक हरे-भरे मैदान में एक विचित्र दृश्य देखने को मिलता था। एक व्यक्ति एक विशाल टिड्डे पर सवार होकर घूमता था और अपने हाथ में पकड़ी तेज हंसिया से छोटे जानवरों को डराता रहता था। एक दिन उसने घास में खेल रहे एक नन्हे चूहे को पकड़ने का प्रयास किया। उसने अपने टिड्डे को तेज़ी से चूहे की ओर दौड़ाया। टिड्डा लंबी छलांगें भरते हुए चूहे के बिल्कुल करीब पहुंच गया। तभी चूहे ने अपनी सूझ-बूझ का परिचय दिया। वह अचानक मुड़ा और अपने नन्हे पैरों से बिल के पास की ढीली मिट्टी हवा में उछालने लगा। मिट्टी उड़कर सीधे उस व्यक्ति और टिड्डे की आंखों में जा गिरी। टिड्डा घबराकर रुक गया और संतुलन बिगड़ने से उस व्यक्ति की हंसिया हाथ से गिर गई। इस मौके का लाभ उठाकर चूहा फुर्ती से अपने बिल में छिप गया। उस व्यक्ति को समझ आ गया कि किसी को छोटा समझकर डराना गलत है।

लालच बुरी बला
तनवी मीणा, उम्र 13 वर्ष
एक घने जंगल में एक चूहा रहता था। एक दिन उसे कहीं से एक बहुमूल्य चमकदार हीरा मिल गया। चूहा उस हीरे को पाकर फूला नहीं समाया और पूरे जंगल में उसे लेकर इतराने लगा। तभी वहां से एक चालाक जादूगर गुज़रा। चूहे के पास असली हीरा देख उसकी नीयत डोल गई और उसने हीरे को हथियाने की योजना बनाई। जादूगर ने चूहे से मित्रता का ढोंग किया और बड़े प्यार से कहा, मित्र यह हीरा ऐसे ही तुम्हारे पास शोभा नहीं देता। मैं अपने जादू से इसे एक सुंदर स्वर्ण मुकुट में जड़ सकता हूं, जिसे पहनकर तुम जंगल के राजा लगोगे। चूहा जादूगर की बातों में आ गया और लालच वश उसने हीरा उसे सौंप दिया। हीरा हाथ में आते ही जादूगर अपने उड़न खटोले पर सवार होकर नौ-दो ग्यारह हो गया। चूहा हाथ मलता रह गया और उसे समझ आ गया कि लालच में पड़कर उसने अपनी अनमोल वस्तु खो दी है।

चिंकू, चिंकी और जादुई गाड़ी
आराध्या शर्मा ,उम्र 9 वर्ष
एक थे चिंकू और चिंकी। दोनों बहुत ही शरारती और उधमी थे। दिनभर उनकी धमाचौकड़ी चलती रहती ।कभी खेल, तो कभी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा। उनकी मम्मी अक्सर उन्हें डांटते हुए कहतीं, दिनभर फोन में लगे रहने के बजाय बाहर जाकर खेला करो। एक दिन चिंकी अपनी प्यारी 'चींटी वाली गाड़ी लेकर बाहर खेलने निकली। वह शान से अपनी गाड़ी पर सवार होकर घूम रही थी। चिंकू ने देखा तो उसके पीछे दौड़ पड़ा और बोला, चिंकी, मुझे भी बैठाओ ना । पर चिंकी ने मना कर दिया और गाड़ी और तेज़ भगाने लगी। तभी मम्मी की सख्त आवाज़ आई, चिंकू-चिंकी तुरंत घर के अंदर आओ । दोनों डरकर अंदर भागे और चुपचाप बैठ गए। मम्मी ने उन्हें प्यार से समझाया कि झगड़ा करना बुरी बात है और मिल-जुलकर रहने में ही असली मज़ा है। थोड़ी ही देर में दोनों का गुस्सा ठंडा हो गया। चिंकू बोला, ठीक है, अब हम नहीं झगड़ेंगे। चिंकी ने भी उसे अपनी गाड़ी पर बैठा लिया। अब दोनों खुशी-खुशी साथ मिलकर खेलने लगे।

साहस और समझदारी
प्रांजल जोशी ,उम्र 9 वर्ष
एक सुंदर दोपहर, एक व्यक्ति एक विशाल टिड्डे पर सवार होकर खेत के रास्तों से गुज़र रहा था। तभी अचानक एक क्रोधी चूहा हाथ में तलवार लिए उनका रास्ता रोककर खड़ा हो गया। चूहे को लगा कि वे बिना अनुमति उसके खेत से जा रहे हैं। चूहे को गुस्से में अपनी ओर आता देख वह व्यक्ति घबराया नहीं। उसने शांति से कहा, मित्र, हम यहां से केवल गुज़र रहे हैं, हम किसी का नुकसान नहीं करना चाहते। लेकिन चूहा टस से मस न हुआ और हमला करने के लिए आगे बढ़ा। उस व्यक्ति ने अपने पास मौजूद डंडे से बुद्धिमानी से अपनी रक्षा की। तभी टिड्डे ने अपनी फुर्ती दिखाई और एक ऐसी लंबी छलांग लगाई कि वे पल भर में खतरे से दूर निकल गए। चूहा हाथ मलता रह गया और उसे अपनी जल्दबाज़ी और बेवजह के गुस्से पर पछतावा हुआ।

राजू और उसके अनोखे दोस्त
दृष्टि शर्मा ,उम्र 10 वर्ष
एक छोटे से गांव में राजू नाम का एक लड़का रहता था। उसका सबसे प्यारा दोस्त एक टिड्डा था। वे दोनों साथ में बहुत खेलते थे। लेकिन उनका एक दुश्मन भी था।एक चूहा, जो हमेशा हाथ में नन्ही सी तलवार लेकर उनके पीछे पड़ा रहता था।एक दिन राजू अपने हाथ में चाबुक लिए टिड्डे की पीठ पर बैठकर पार्क में खेल रहा था। तभी अचानक वह चूहा अपनी तलवार लहराते हुए वहां आ धमका। राजू ने अपने टिड्डे को तेज़ी से आगे बढ़ाया और चूहा उनके पीछे-पीछे दौड़ने लगा। भागते-भागते पार्क में बने एक छोटे से तालाब के पास चूहे का पैर फिसल गया और वह छपाक से पानी में गिर गया। चूहे को डूबता देख राजू का दिल पसीज गया। उसने तुरंत अपने चाबुक को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया और चूहे को सुरक्षित बाहर खींच लिया। अपनी जान बचते देख चूहे का गुस्सा गायब हो गया। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने राजू से माफी मांगी। उस दिन के बाद से राजू, टिड्डा और चूहा, तीनों पक्के दोस्त बन गए और साथ मिलकर खेलने लगे।

बहादुर चुलबुल और नन्ही चींटी
काव्या गौर ,उम्र 13 वर्ष
नन्ही चींटी रानी अपने परिवार के लिए भोजन की तलाश में घर से निकली थी। तभी बंटी नाम के एक शरारती लड़के की नज़र उस पर पड़ गई। बंटी ने एक रस्सी के टुकड़े से रानी का रास्ता रोकना शुरू कर दिया, जिससे बेचारी चींटी को चोट भी लगी। रानी मन ही मन घबरा रही थी, पर वह अकेली क्या करती। तभी पास खड़ी चुलबुल चुहिया ने यह देखा। उसे जानवरों पर अत्याचार बिल्कुल पसंद नहीं था। चुलबुल अपनी नन्ही तलवार लेकर बंटी से भिड़ गई। जब तक बंटी संभलता, चुलबुल ने उसे उलझाए रखा। इस मौके का फायदा उठाकर रानी सुरक्षित स्थान पर भाग गई। बंटी हाथ मलता रह गया और बहादुर चुलबुल वहां से फुर्र हो गई।

जिन्न, मच्छर और बहादुर चूहा
अंशिका वर्मा , उम्र 10 वर्ष
एक विशाल जंगल में एक जिन्न रहता था। उसकी सवारी बहुत अजीब थी ।एक बड़ा सा मच्छर। वह अक्सर अपने मच्छर पर सवार होकर चूहों की बस्ती में जाता और उन्हें बहुत परेशान करता था। जिन्न की शरारतों और आतंक से सभी चूहे बहुत दुखी और डरे हुए थे। एक दिन, एक छोटे से बहादुर चूहे ने हिम्मत जुटाई। वह अपनी नन्ही सी तलवार लेकर चुपचाप अपने बिल के पास घात लगाकर बैठ गया। जैसे ही जिन्न मच्छर पर बैठकर चूहों पर हमला करने आया, वह बहादुर चूहा बिजली की तेजी से निकला और अपनी तलवार लहराते हुए जिन्न के पीछे भागा। चूहे का यह रौद्र रूप देखकर जिन्न की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। वह इतना डर गया कि अपने मच्छर के साथ दुम दबाकर वहां से भाग निकला। उस दिन के बाद, जिन्न ने कभी चूहों की बस्ती की ओर मुड़कर नहीं देखा और सभी चूहे हमेशा के लिए खुशी-खुशी रहने लगे।

रमा की अनोखी सवारियां
इशिता भंडारी , उम्र 13 वर्ष
एक समय की बात है, एक छोटा सा गांव था जहां रमा नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसे अपने पालतू झींगुर की सवारी करना बहुत पसंद था। एक दिन उसने पूरे गांव का चक्कर लगाने की सोची। तभी रास्ते में उसे एक चूहा दिखा, जो बहुत गुस्से में था और हाथ में नन्ही सी तलवार लिए खड़ा था। रमा ने शरारत में चूहे को चिढ़ाते हुए कहा, देखो, तुम्हारे पास तो कोई सवारी ही नहीं है। चूहे को बहुत गुस्सा आया और वह तलवार लेकर उन दोनों के पीछे दौड़ पड़ा। रमा और झींगुर अपनी जान बचाकर तेज़ी से भाग निकले। जब वे दोनों थककर रुके, तो रमा ने एक प्रस्ताव रखा। उसने चूहे से कहा, अगर तुम भी मेरी सवारी बन जाओ तो कैसा रहेगा। झींगुर को थोड़ी चिंता हुई, फिर मेरा क्या होगा। रमा ने हंसकर कहा, एक दिन मैं तुम्हारी सवारी करूंगा और एक दिन चूहे की। इस तरह तीनों दोस्त बन गए। लेकिन कुछ दिनों बाद चूहे को थोड़ा बुरा लगने लगा। उसे लगा कि रमा, झींगुर से ज़्यादा बातें करता है और उसे अनदेखा कर रहा है। जब झींगुर अपने परिवार से मिलने गांव गया, तब चूहे ने अपनी उदासी रमा को बताई। रमा ने उसे प्यार से समझाया, दोस्त, ऐसा कुछ नहीं है। तुम अपनी मनगढ़ंत कहानियां बनाकर बुरा मत महसूस करो। मेरे लिए तुम दोनों बराबर हो। चूहा समझ गया और उसकी गलतफहमी दूर हो गई।

दुष्ट जादूगर और साहसी मूषक
सानिध्य ,उम्र 9 वर्ष
एक समय की बात है, एक बहुत ही दुष्ट जादूगर था। वह अपनी जादुई शक्तियों का गलत इस्तेमाल करता था। वह मासूम लोगों को मंत्रों के प्रभाव से कॉकरोच बना देता और फिर उन पर सवारी करके उन्हें खूब परेशान करता था। जादूगर के आतंक से तंग आकर सभी ग्रामीण भगवान गणेश की शरण में पहुंचे और अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना की। दयालु गणेश जी ने उनकी पुकार सुनी और अपने वाहन मूषक को उस घमंडी जादूगर को सबक सिखाने के लिए भेजा। अगले दिन, जैसे ही जादूगर फिर से ग्रामीणों को सताने के लिए आया, गणेश जी का मूषक एक चमकती हुई तलवार लेकर प्रकट हुआ। मूषक को अपनी ओर आता देख जादूगर घबरा गया। मूषक ने तलवार लहराते हुए जादूगर का पीछा किया और उसे पूरे गांव में इतना दौड़ाया कि जादूगर थककर बेहाल हो गया। अंत में, अपनी जान बचाने के लिए जादूगर मूषक के पैरों में गिर पड़ा। उसने अपनी गलती मानी और वादा किया कि वह आगे से कभी किसी को परेशान नहीं करेगा। मूषक की बहादुरी से सभी ग्रामीण फिर से इंसान बन गए और सुख से रहने लगे।

टीना और रेशु की अनोखी डायरी
कशिश शर्मा ,उम्र 8 वर्ष
टीना और रेशु दोनों भाई-बहन थे। एक दिन वे एक सुंदर तालाब के किनारे बैठे थे। अचानक टीना के मन में एक विचार आया और वह बोली रेशु, मुझे एक आईडिया आया है। क्यों न हम यहां दिखने वाले अलग-अलग जानवरों के बारे में कुछ लिखें । रेशु को यह बात बहुत पसंद आई और उसने कहा, वाह टीना यह तो बहुत अच्छा विचार है। तभी टीना के हाथ पर दो रंग-बिरंगी तितलियां आकर बैठ गईं और रेशु को पानी में एक नन्हा सा मेंढक फुदकता हुआ दिखाई दिया। वे दोनों खुशी से चिल्ला उठे, चलो, अब इनके बारे में लिखना शुरू करते हैं। उन दोनों ने मिलकर जानवरों की खूबियों के बारे में एक सुंदर लेख तैयार किया और अपनी मां को दिखाया। उनकी मां बच्चों की यह मेहनत और रचनात्मकता देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने प्यार से दोनों को गले लगाया और इनाम के तौर पर उन्हें एक सुंदर तोहफा दिया।

तलवारबाज चूहा और जादूगर
ऋतिका न्याती ,उम्र- 8 वर्ष
एक घने जंगल में एक विशाल टिड्डा रहता था। एक दिन एक दयालु जादूगर उस टिड्डे की पीठ पर सवार होकर जंगल की सैर कर रहा था। तभी अचानक एक नन्हा चूहा हाथ में नंगी तलवार लिए उनके सामने आ खड़ा हुआ। चूहा बड़े गर्व से चिल्लाया, ठहरो अब से मैं इस जंगल का राजा हूं। सबको मेरी आज्ञा माननी होगी चूहे की यह बचकानी बात सुनकर जादूगर धीमे से मुस्कुराया। उसने पलक झपकते ही अपनी छड़ी घुमाई और जादू किया। देखते ही देखते, चूहे की चमकदार तलवार लकड़ी की एक साधारण छड़ी में बदल गई। चूहा हक्का-बक्का रह गया। जादूगर ने शांति से कहा, मेरे नन्हे दोस्त, याद रखो कि असली ताकत किसी हथियार में नहीं, बल्कि हमारे अच्छे विचारों और व्यवहार में होती है। चूहे को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसका सिर शर्म से झुक गया। उसने वह लकड़ी की छड़ी फेंक दी और अपनी बदतमीजी के लिए सबसे माफी मांगी। उस दिन के बाद से उसने दूसरों को डराना छोड़ दिया और अपनी फुर्ती का इस्तेमाल सबकी मदद करने में करने लगा।

साहस की असली परीक्षा
गोविंद मालव ,उम्र - 6 वर्ष
सुनहरी सुबह में एक नन्हा बालक अपने टिड्डे पर सवार होकर सैर कर रहा था। तभी एक अहंकारी चूहे ने तलवार लहराते हुए उसका रास्ता रोका और खुद को जंगल का राजा बताया। बालक डरा नहीं, बल्कि मुस्कुराकर बोला, सच्चा राजा वह है, जो डर नहीं बल्कि सबका दिल जीतता है। जब चूहा हमला करने लगा, तो टिड्डे की जोरदार छलांग से वह गिर पड़ा। बालक ने उसे चोट पहुंचाने के बजाय सहारा देकर उठाया और दोस्ती का हाथ बढ़ाया। बालक की दया देख चूहे की आंखें भर आईं। उसने तलवार फेंक दी और वादा किया कि अब से वह डर नहीं, बल्कि प्रेम और भरोसा फैलाएगा।

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