
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर। फाइल फोटो पत्रिका
Government schools: शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब राजस्थान लोक सेवा आयोग तथा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षाओं को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की परीक्षा सरकारी स्कूलों में आयोजित नहीं की जाएगी। यदि कोई परीक्षा करानी होगी तो पहले निदेशालय से इसकी अनुमति लेना आवश्यक होगा।
शिक्षा विभाग की मंशा है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। अभी सरकारी स्कूलों में रविवार को अवकाश के दिन को छोड़कर भी अन्य कार्य दिवसों में कई तरह की प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे स्कूल में अवकाश का प्रभाव कम हो रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस निर्णय से शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
शिक्षा निदेशक ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को आदेश दिए हैं कि वे राजस्थान लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन बोर्ड एवं विभाग की ओर से निर्धारित परीक्षा कार्यक्रम के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की परीक्षा के आयोजन के लिए निदेशालय से अनुमति एवं स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही करवाएं। निदेशालय से पूर्व अनुमति मिलने पर ही विद्यालय परिसर के उपयोग की अनुमति प्रदान की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। इससे स्कूलों में शैक्षणिक कार्य प्रभावी रूप से चल पाएंगे और विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण अपनी नियमित पढ़ाई से नहीं हटेंगे। विभाग का यह निर्णय छात्रों की सफलता और शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
सरकारी स्कूलों में परीक्षा आयोजन के लिए अब कड़ी नियमावली लागू कर दी गई है। निदेशालय की अनुमति के बिना कोई परीक्षा नहीं हो सकेगी, जिससे अनावश्यक परीक्षाओं का बोझ कम होगा। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई का माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है।
शिक्षा विभाग का यह निर्णय निश्चित रूप से स्वागत योग्य और दूरदर्शी कदम है। लंबे समय से सरकारी स्कूलों में विभिन्न परीक्षाओं के कारण नियमित पढ़ाई बाधित हो रही थी, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होती थी। अब बिना अनुमति किसी भी परीक्षा के आयोजन पर रोक लगने से विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा और विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होगी, बल्कि स्कूलों को उनके मूल उद्देश्य—पढ़ाई—पर केंद्रित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कुल मिलाकर, यह निर्णय विद्यार्थियों के हित में एक सकारात्मक बदलाव है।
Updated on:
17 Mar 2026 06:40 pm
Published on:
17 Mar 2026 06:06 pm
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