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नियमों की आड़ में निकायों की मनमानी, सरकार की ‘रसोईÓ में घरेलू गैस सिलेंडर

- अस्पतालों व बस्तियों में चल रही रसोइयों में मिले घरेलू गैस सिलेंडर  

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जयपुर

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Jaya Gupta

Jan 19, 2023

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जया गुप्ता/जयपुर।जोधपुर गैस दुखांतिका को हुए अभी कुछ ही दिन बीते हैं और अब जयपुर में सरकार की 'व्यावसायिक रसोइयोंÓ में ही घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से संचालित इंदिरा रसोइयों में अधिकांश स्थानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों से ही खाना पकाया जा रहा है। ये गैस कनेक्शन संबंधित नगर निकायों ने ही करवाए हैं।
दरअसल, रसोई संचालन के लिए बनाई गई पॉलिसी में इस बारे में कोई उल्लेख नहीं है। इसका फायदा उठाकर नगर निकायों ने कई रसोइयों में घरेलू गैस कनेक्शन दिलवा दिए, वहीं कुछ में व्यावसायिक। राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने शहर की विभिन्न इंदिरा रसोइयों में जाकर देखा तो अधिकांश में घरेलू गैस सिलेंडर मिले।

अलग-अलग जगह मिली यह स्थिति

रसोई 1 : ट्रांसपोर्ट नगर फ्लाईओवर के नीचे

यहां मास्टर रसोई है। यहां से घाटगेट, पुरानी चुंगी नाका और जनता मार्केट सब्जी मंड़ी स्थित रसोई में भी खाना भेजा जाता है। चपाती पकाने के लिए सेमी ऑटोमैटिक मशीन लगी हुई है। यहां तीन सिलेंडर घरेलू श्रेणी के मिले। जहां लोग खाना खा रहे थे, वहीं रोटी बनाने की मशीन लगी हुई थी। इस रसोई में सुबह 5 बजे से रात तक लगातार खाना बनता है। रोजाना करीब 1500 व्यक्तियों का खाना इस रसोई में बनता है। रोजाना दो सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं।

रसोई 2 : झालाना

इस रसोई में घरेलू गैस सिलेंडर से ही खाना बनाया जा रहा था। रोजाना 400-450 लोगों का खाना पूरे दिन में बनता है। हर दूसरे दिन सिलेंडर खत्म हो जाता है। यहां शुरुआत से ही घरेलू गैस सिलेंडर ही उपयोग में आ रहा है।

रसोई 3 : गणगौरी अस्पताल

अस्पताल परिसर के भीतर रसोई संचालित है। भर्ती मरीजों के परिजन यहां खाना खा रहे थे। रसोई के बाहर रोटी बनाने की बड़ी गैसनुमा भट्टी लगी हुई थी। इसमें भी घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा था। पास ही लोग खाना खा रहे थे।

होटल-रेस्टोरेंट के लिए सिलेंडर का नियम

होटल, रेस्टोरेंट व ढाबे सहित खाद्य सामग्री का निर्माण कर बेचने वाले अन्य प्रतिष्ठानों के लिए नियमानुसार व्यावसायिक सिलेंडर का उपयोग होना चाहिए। कोई भी प्रतिष्ठान व्यावसायिक सिलेंडरों की जगह घरेलू सिलेंडर का उपयोग नहीं कर सकता है।

दोनों सिलेंडरों में है यह फर्क

घरेलू गैस सिलेंडर -- 14.2 किलो -- 1056 रुपए -- 5 प्रतिशत जीएसटी

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर -- 19 किलो -- 1788 रुपए -- 18 प्रतिशत जीएसटी

राज्य पर असर..

- राजस्व का नुकसान हो रहा है। घरेलू सिलेंडर पर 5 प्रतिशत जीएसटी है। जबकि कॉमर्शियल पर 18 फीसदी जीएसटी है। यदि कॉमर्शियल सिलेंडर के इस्तेमाल से सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा।

मुझ पर असर..

- घरेलू गैस सिलेंडर के व्यावसायिक इस्तेमाल से घरों में समय पर सिलेंडर नहीं पहुंचते। कई इलाके ऐसे हैं, जहां बुकिंग के 4-5 दिन बाद सिलेंडर पहुंचते हैं।

- यदि घरेलू सिलेंड़र का व्यावसायिक उपयोग नहीं होगा तो इनकी किल्लत नहीं होगी।

फैक्ट फाइल :

- 951 इंदिरा रसोई पूरे प्रदेश में संचालित

- 8.21 करोड़ से अधिक थाली अभी तक लोगों ने खाई

- 2.30 लाख थाली रोजाना खाई जा रही प्रदेश में

- 60 इंदिरा रसोई संचालित है जयपुर शहर में

- 22,200 थाली रोजाना खाई जा रही जयपुर में

- किसी भी व्यावसायिक स्थान पर घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं हो सकता है।

- महेंद्र मीना, डीएसओ, जयपुर शहर