-एक ही सीरीज से जारी फर्जी टिकट के सभी नंबर पत्रिका को मिले
-अफसरों ने अन्य स्मारकों में भी ई-टिकटिंग में जताई गड़बड़ी की आशंका
-पुरातत्व विभाग के निदेशक ने तकनीकी खामी बताई
जयपुर. हवामहल में मंगलवार को ई-मित्र संचालक की ओर से ई-टिकटिंग ट्रायल के दौरान ही फर्जीवाड़ा करने के मामले ने पुरातत्व विभाग में खलबली मचा दी है। दो माह से चल रहे इस घपले की परतें अब खुल रही हैं। हवामहल प्रशासन ने बुधवार को माना कि एसएलपी जाईफर लिमिटेड की ओर से नियुक्त ई-मित्र काउंटउर संचालक ने 16 फर्जी ई-टिकट बनाए। मामला खुला तो काउंटर बंद कर सीपीयू लेकर भाग गया।
हवामहल अधीक्षक के पत्र से खुलासा
हवामहल अधीक्षक सरोज चंचलानी की ओर से विभाग के शीर्ष अफसरों को लिखे पत्र में खुलासा हुआ कि काउंटर पर फर्जी टिकट काटे जा रहे थे। 800 रुपए कीमत के 16 फर्जी टिकट काटे गए। प्रवेश द्वार पर गार्ड श्योजीराम माली और मुकेश कुमार शर्मा की ओर से की गई जांच में यह घपला सामने आया।
दिनभर बैठकों का दौर
हवामहल में फर्जी टिकट का मामला सामने आने पर पुरातत्व विभाग में सुबह से ही इस मामले को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया। बैठक में विभाग के कुछ अफसरों ने सभी स्मारकों पर फर्मों की ओर से फर्जी टिकट काटने की आशंका जताते हुए निदेशक महेन्द्र खड़गावत से जांच की बात कही। लेकिन खड़गावत ने इसे तकनीकी खराबी के कारण एक ही सीरीज के टिकट कटने की बात कही।
2015 में भी हो चुका खेल
जानकारी के अनुसार 2015 में शहर के स्मारकों में फर्जी टिकट काटने का घोटाला उजागर हुआ था। मामले में एसीबी जांच हुई और कई अफसर सस्पेंड हुए लेकिन बाद में मामला रफा-दफा कर दिया गया। घपले में शामिल अफसरों को पदोन्नति तक मिल गई।