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सरकार के विरोध में कर्मचारी हुए लामबंद, आंदोलन का किया निर्णय, 23 जनवरी को राजधानी में निकालेंगे आक्रोश रैली

जयपुर। राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों और संवादहीनता के विरोध में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है। यह निर्णय रविवार को महासंघ के संघर्ष चेतना महाधिवेशन में लिया गया। जिसमें महासंघ से सम्बद्ध 82 घटक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Dec 25, 2022

जयपुर। राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों और संवादहीनता के विरोध में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया है। यह निर्णय रविवार को महासंघ के संघर्ष चेतना महाधिवेशन में लिया गया। जिसमें महासंघ से सम्बद्ध 82 घटक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
महासंघ की संघर्ष समिति के प्रदेश संघर्ष संयोजक महावीर प्रसाद शर्मा और सचिव अर्जुन शर्मा ने बताया कि महासंघ के अधिवेशन में लिए गए निर्णयों के मुताबिक ब्लॉक स्तर पर संघर्ष समितियों/तहसील उपशाखाओं और विभागीय समितियों का 31 दिसंबर तक गठन किया जाएगा।साथ ही संघर्ष चेतना बैठकें होंगी। 4 जनवरी से 6 जनवरी तक सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदेश पदाधिकारी संघर्ष चेतना यात्रा निकालेंगे। इसके बाद 11 जनवरी को ब्ल्ॉाक स्तर पर धरने और प्रदर्शन होंगे। 18 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों पर वाहन रैली निकाली जाएगी और 23 जनवरी को महासंघ महा आक्रोश रैली का आयोजन करेगा।
उनका कहना था कि राज्य सरकार लगातार कर्मचारियों की उपेक्षा कर रही है और लिखित समझौतों से मुकर रही है जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी स्वंय को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार ने चार साल में महासंघ से एक बार भी संवाद नहीं किया जो कि लोकतांत्रिक परम्पराओं के विपरीत है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ प्रदेश के राज्य कर्मचारी, बोर्ड,निगम, स्वायत्तशाषी संस्थाओं, सहकारी संस्थाओं, पंचायती राज एवं अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यरत 8 लाख कार्मिकों का प्रतिनिधित्व करता है।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष आयुदान सिंह कविया और प्रदेश महामंत्री तेजसिंह राठौड़ ने अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार नौकरशाहों के चुंगल में फंस गई है, नौकरशाह सरकार की छवि खराब कराने में लगे हुए हैं। सरकार ने समय रहते महासंघ के 15 सूत्रीय मांग पत्र पर द्विपक्षीय वार्ता आयोजित कर मांगो का निराकरण नहीं किया तो राज्य कर्मचारी आम हड़ताल जैसा कदम उठाने के लिए विवश होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। अधिवेशन को विभिन्न कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।
मुख्य मांगें:.
कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर कर वर्ष 2013 की अनुसूची 5 के अनुसार सातवें वेतन आयोग में वेतन निर्धारण किया जाए और न्यूनतम वेतन 26000 किया जाए
9,18 और 27 वर्ष की सेवा पर एसीपी के स्थान पर 7,14,21 एवं 28 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति पद का वेतनमान स्वीकृत किया जाए
विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा किए गए समझौतों एवं सहमतियों को लागू किया जाए।
सहायक कर्मचारियों को एमटीएस घोषित किया जाए।
नियमित पदों पर संविदा कार्मिकों के भर्ती के लिए जारी संविदा नियम 2022 को प्रत्याहारित कर रिक्त पदों पर नियुक्त संविदा कार्मिकों / अस्थाई कार्मिकों को नियमित किया जाए।
पारदर्शी स्थानांतरण नीति जारी की जाए।
प्रदेश में लागू की गई पुरानी पेंशन योजना के बाद कर्मचारियों के एनपीएस की राशि जी पी एफ खाते में स्थानांतरित की जावे तथा कर्मचारियों द्वारा लिए गए ऋण की वसूली के जारी आदेशों को प्रत्याहारित किया जाए।
प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों को शासन सचिवालय के समान वेतन भत्ते स्वीकृत किए जाए।
कर्मचारी संगठनों के धरना प्रदर्शन पर रोक के लिए सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक निर्णय कर जारी किए गए नो वर्क नो पे के आदेश दिनांक 05ण्10ण्2018 को प्रत्याहरित किया जाए