
दूसरों के साथ भोजन साझा करना तनाव को कम करने, आत्म-सम्मान को बढ़ावा देने और सामाजिक संबंध में सुधार करने का एक शानदार तरीका है। परिवारों में माता पिता का मानना है कि जब वे अक्सर भोजन पर एक दूसरे से मिलते हैं तो उनके परिवार को कम तनाव का अनुभव होता है।
यू.एस. वेकफील्ड रिसर्च द्वारा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के हेल्दी फॉर गुडटीएम कार्यक्रम के लिए सितंबर में देश भर के 1000 व्यक्तियों ने सवालों जवाब में इस भावना को व्यक्त किया। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पुराना और लगातार तनाव आपके जीवन भर के हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, इसलिए लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जितना जल्दी हो सके तनाव को कम करने और प्रबंधित करने के तरीके खोजें।
सर्वेक्षण में पाया गया कि 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि दूसरों के साथ भोजन साझा करना दूसरों के साथ बातचीत के महत्व की याद दिलाता है और 54 फीसदी ने कहा कि यह ब्रेक लेने के लिए एक रिमाइंडर के रूप में कार्य करता है। उत्तरदाताओं ने संकेत दिया कि वे दूसरों के साथ भोजन करते समय स्वस्थ भोजन चुनने के लिए अधिक इच्छुक (59 प्रतिशत) हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए अपने दोस्तों या परिवार के साथ शेड्यूल का समन्वय करना चुनौतीपूर्ण लगता है। सामान्य तौर पर उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने लगभग आधा समय अकेले खाया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर हफ्ते भोजन के लिए दोस्तों, परिवार या सहकर्मियों को इकट्ठा करने का लक्ष्य निर्धारित करें। यदि आप व्यक्तिगत रूप से एक साथ नहीं मिल सकते हैं, तो सोचें कि आप फोन या कंप्यूटर पर एक साथ भोजन कैसे साझा कर सकते हैं। सर्वे में यह पूछे जाने पर कि क्या सहकर्मियों के साथ ब्रेक लेने और दोपहर का भोजन करने के लिए अधिक समय होने से उन्हें काम पर कम तनाव महसूस करने में मदद मिलेगी, लगभग 10 में से 7 (69 फीसदी) प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की, जो पूर्ण या अंशकालिक काम करते हैं।
परिवार में बढ़ता है प्यार व जुड़ाव
एक साथ खाना खाने से हमें एक दूसरे के पसंद नापसंद के बारे में पता चलता है। खाते वक्त खाने की ही चर्चा होनी चाहिए। इसके अलावा इससे आदर सम्मान बढ़ता है। शेयरिंग की भावना बढ़ती है। आपस में ज्यादा जुड़ाव होता है। परिवार में प्यार बढ़ेगा। एक साथ बैठकर खाने से बच्चे अच्छी आदतें सीखते हैं। उन्हें कैसे खाना खाना चाहिए इसका तरीका मालूम होगा। अभिभावक को बच्चों के खाने पीने के बारे में पता चलता है। महिलाओं को इसका फीडबैक मिलता है कि घर में क्या बनना चाहिए।
डा.ललिता छोरलिया
क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट, स्पेशल एजुकेटर
Published on:
12 Oct 2022 10:03 pm
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