
ईसबगोल की खेती
कम पानी में तैयार पौधे
कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली ईसबगोल की फ सल किसानों को मालामाल कर सकती है। जिले की सरहद पर किसान हनुमानराम, रामदेव और रमेश चूला पिछले दो साल से इसकी खेती कर अच्छा मुनाफ ा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि इसके नौ से ग्यारह हजार रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल जाता है।
अक्टूबर- नवंबर में बुवाई
किसान रमेश चूला ने बताया कि उन्होंने पहली बार चार बीघा और अगली बार दस बीघा में ईसबगोल की खेती की। जिसका उन्हें काफी फायदा मिला। ईसबगोल की बुवाई रबी सीजन यानी अक्टूबर-नवंबर महीने में की जाती है और इसकी फ सल मार्च तक पककर तैयार हो जाती है। ईसबगोल की खेती मीठे पानी से होती है। इसमें तीन से चार क्विंटल प्रति बीघा पैदावार ली जा सकती है।
जिन कुओं में खारा पानी है वे किसान फॉर्म पॉण्ड बनाकर इसकी खेती कर सकते है। बुवाई के बाद तीन पानी देने से फ सल पक कर तैयार हो जाती है। पत्तियों का रंग पीला तथा बाली लाल होकर दाने हाथ से मसलने पर ही निकलने लगे तो इसकी परिपक्वता पूर्ण हो जाती है।
गुणकारी भी है ईसबगोल
ईसबगोल के बीज पर पाए जाने वाला छिलका ही इसका औषधीय उत्पाद है। जिसे ईसबगोल की भूसी के नाम से जाना जाता है। इसकी भूसी में पानी सोखने की क्षमता अधिक होती हैं । इसलिए कफ , पेचिस, कब्ज, दस्त, मोटापा, डिहाइड्रेशन, डायबिटीज, अल्सर, बवासीर जैसे रोगों में बहुत गुणकारी है। एलोपैथी और आयुर्वेदिक दोनों में इसे औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ईसबगोल में फाइबर की मात्रा काफी अधिक होती है। इसमें फैट और कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा भी नहीं होती है। इस का सेवन हर उम्र के लोग कर करते हैं।
Published on:
16 Oct 2022 04:05 pm
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