
जयपुर.
खाद्य सुरक्षा योजना में राशन के गेहूं परिवहन के टेंडर में लोक उपापन के नियमों की अनदेखी हो रही है। जयपुर जिले में डिपो से राशन की दुकानों तक गेहूं पहुंचाने के लिए जारी किए गए 7 करोड़ के टेंडर में गड़बड़झाले की आशंका है। दरअसल चहेती फर्म को टेंडर नहीं मिलने की आशंका के चलते जिला प्रबंधक ने तीन महीने तक टेंडर खोला ही नहीं। अब वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर इसी टेंडर को परिवहन की कई गुना दरों पर चहेती फर्म को देने की तैयारियां की जा रही है। यह कारगुजारी सामने आने के बाद जयपुर जिला प्रबंधक अनिल गोयल को आरोप पत्र दिया गया है।
टेंडर की वैकल्पिक व्यवस्था से सरकार को लगेगी तीन करोड़ की चपतसूत्रों के अनुसार 2 दिसंबर को गेहूं परिवहन के लिए जारी टेंडर की लागत सात करोड़ रुपए थी। जिसे अब तक खोला नहीं गया। जयपुर जिला प्रबंधक अनिल गोयल ने विभाग के शीर्ष अफसरों को गेहूं लेप्स होने की बात कह कर आनन फानन में तीन माह के लिए वैकल्पिक टेंडर जारी कर दिया। जिससे चहेती फर्म को उपकृत किया जा सके। इस टेंडर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं परिवहन की अधिकृत दरों के मुकाबले दरें 50 प्रतिशत से ज्यादा आई हैं। जबकि दिसंबर में जारी हुए टेंडर की दरें 20 प्रतिशत से भी नीचे थी। नई दरों के हिसाब से सरकार को इस टेंडर में 3 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लगने की आशंका है।
लाभार्थी भटक रहे हैं गेहूं के लिए
उधर गेहूं परिवहन का नया टेंडर नहीं होने से एक महीने से गेहूं का उठाव नहीं हो रहा है। जयपुर जिले में राशन की दुकानों पर लाभार्थियों को गेहूं नहीं मिल रहा है।
वर्जन
जिला प्रबंधक ने तीन महीने तक टेंडर क्यों नहीं खोला इस मामले में उसे नोटिस दे दिया है। वैकल्पिक टेंडर से सरकार को राजस्व की हानि होगी। इसके लिए भी जिला प्रबंधक के खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।
- परमेश्वर लाल, एमडी,खाद्य व नागरिक आपूर्ति निगम
Published on:
11 Mar 2023 10:43 pm
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