
Gandhi Jayanti 2023 : भारत के राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी जिन्हें बापू या महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है, उनका जन्म दिन 2 अक्टूबर 1869 को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। वस्तुत: गांधीजी विश्व भर में उनके अहिंसात्मक आंदोलन के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति वैश्विक स्तर पर सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। अपने अहिंसक आंदोलन से बापू ने अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया और अंतत: 15 अगस्त, 1947 को देश गुलामी की जंजीरों से आजाद हो गया।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधीजी ने पूरे देश का दौरा किया था। इस दौरान वह कई बार राजस्थान भी आए। उनका प्रदेश से काफी लगाव था, खासकर सीकर जिले से उनके विशेष लगाव था। इसका मुख्य कारण थे जमनालाल बजाज। बापू उन्हें अपने पुत्र की तरह मानते थे। जमनालाल एक जानेमाने उद्योगपति होने के साथ साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उनका जन्म सीकर के काशी का बास में एक मारवाड़ी परिवार में 4 नवंबर, 1884 को जन्म हुआ था। वे महात्मा गांधी के बेहद करीबी होने के साथ-साथ उनके प्रमुख अनुयायीयों में से एक थे।
गांधी की इन बातों से थे काफी प्रभावित
बापू के विचारों और उनके जीवनशैली से जमनालाल बजाज बेहद प्रभावित थे। वह बापू के उस विचार से इत्तेफाक रखते थे भारतीयों को विदेशी चीजों को अपनाने की बजाए स्वेदशी अपनाने पर जोर देना चाहिए। ऐसा करने से भारतीय मजदूरों का शोषण होने से बचेगा और अंग्रेजों की आर्थिक स्थिति की नींव कमजोर पड़ेगी। बजाज गांधीजी के साबरमति आश्रम में बिताई जा रही जीवन शैली से भी इतने प्र्रभावित थे कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आश्रम में ही रहने लगे थे।
अजमेर और ब्यावर से भी था खास लगाव
सीकर जिले के अलावा बापू जब भी राजस्थान आते थे, तो वह अजमेर और ब्यावर भी जाते थे। गांधी जी जब भी अजमेर आते थे, उनका मुख्य मकसद सामाजिक बुराईयों को दूर करना था, खासकर छुआ छूत की प्रथा को खत्म करना उनका मुख्य मकसद था। चाहे कुंए से पानी लेना हो या स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश लेना हो, सामाज उसा वक्त जातियों के बंधन से इस तरह बंधा हुआ था कि जातियों के आधार पर ही इन जगहों पर प्रवेश दिया जाता था। हालांकि, बापू की अजमेर यात्रा का लोगों पर इतना सकारात्मक असर पड़ा की धीरे धीरे छुआ छूत का भेद दूर होता चला गया। उनका मानना था कि अंग्रेजों से आजादी चाहिए थे, तो ऐसी सामाजिक कूरीतियों को खत्म करना बेहद जरूरी है।
विधवा विवाह के लिए आगे आए लोग
गांधी जी की ब्यावर यात्रा के दौरान उनके स्वागत में भीड़ उमड़ पड़ी। उन्होंने यहां भी गुलामी की जंजीरों को तोडऩे के लिए लोगों से सामाजिक बुराईयों को खत्म करने के लिए आह्वान कि या। उस वक्त विधवा विवाह को लोग अच्छा नहीं मानते थे। हालांकि, बापू की बातों से प्रभावित होकर जब लोगों ने पहला विधवा करवाया तो यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ।
Published on:
02 Oct 2023 11:47 pm
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