जयपुर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी तमाम रोचक जानकारियां अब सैलानियों को जयपुर में मिलेंगी। हरियाली के बीच बनी इस गांधी वाटिका का शनिवार को उद्घाटन हुआ। वाटिका की दीवारों पर जो तस्वीरें उकेरी गईं हैं वे आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के संघर्ष की यादें दिलाएंगी।
खास-खास
-85.00 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जेडीए ने इसे बनाने में
-11 सदस्यीय समिति ने वाटिका को दिया है मूर्तरूप
वाटिका के तीन महत्वपूर्ण हिस्से
इस वाटिका के तीन महत्वपूर्ण हिस्से हैं। सैलानी आसानी से सब कुछ समझ सकें, इसके लिए डिजिटल एवं नवीन तकनीक के आधार पर इसे विकसित किया गया है।
पहला हिस्सा: ग्राउंड फ्लोर पर अंग्रेजों के भारत आगमन से लेकर गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास तक की कहानी बयां की गई है। इसे पांच खंडों में बांटा गया है।
-वैभव की रोशनी – गुलामी का अंधेरा
-आजादी की आहट
-1857 की बगावत और घबराए अंग्रेज
-गांधी: एक बड़े आदमी की छोटी सी कहानी
-दक्षिण अफ्रीका: गांधी के अनुभव और उनका हृदय परिवर्तन
दूसरा हिस्सा: प्रथम तल पर विकसित किया गया है। इसमें महात्मा गांधी के भारत में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। इस हिस्से को पांच खंडों में बांटा गया है।
-स्वदेश आगमन
-गांधीमय हुआ देश
-1942:अंग्रेजों भारत छोड़ो-भारत को चुनौती देती सांप्रदायिक ताकतें
-आखिरी दिन: आखिरी प्रयोग
तीसरा खंड: वाटिका के द्वितीय तल पर एक विशेष पुस्तकालय बनाया गया है। सेमिनार हॉल, कॉन्फ्रेंस कक्ष बनाया गया है। इसे तीन खंडों में बांटा गया।
-राजस्थान ने पकड़ी गांधी की राह
-गांधी: अपने आईने में मैं
-गांधीजी जी के सपनों का संसार
ये खास
-वाटिका में मिट्टी की दीवारें बनाई गई हैं।
-वाटिका के चारों ओर हरियाली को बढ़ावा दिया गया है।
-इसके लिए 14 हजार पौधे लगाए गए हैं।
ये भी खास
प्रशासकीय खंड के अलावा दो प्रदर्शन-कक्ष, मध्यवर्ती हरा मैदान, एक गांधी पुस्तकालय, कैफेटेरिया, खुला नाट्य-मंच, खुला बड़ा मंच, विमर्श कक्ष की सुविधाएं मिलेंगी।