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आज अनंत चतुर्दशी है और भगवान गणेश के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद खास है. भक्त गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गणपति को अपने घरों में बैठाते हैं. इस दौरान घरों में लगातार विधिवत पूजा पाठ चलता रहता है.और अनंत चतुर्दशी को भगवान गणेश का विसर्जन किया जाता है.लोग गाजे-बाजे के साथ गणपति बप्पा मोरया, अगले वर्ष तू जल्दी आ.जैसे जयघोष के साथ जलाशयों पर जाकर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे. लेकिन विसर्जन के लिए कई बाते है जो हमारे लिए जानना बहुत जरूरी है.
-सबसे पहले भगवान गणेश को स्नान कराएं
-स्नान के बाद वस्त्र पहनाएं
- विदा करने से पहले भोग लगाएं
- आरती करने के बाद मंत्रों से उनका स्वास्तिवाचन करें
- लकड़ी का एक पटरा लें. उसे गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें.
- घर की महिला इस पटरे पर स्वास्तिक बनाए.
- अब इस पटरे पर अक्षत रखने के बाद पीला, गुलाबी या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं.
- अब वस्त्र के ऊपर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरें.
- पटरे के हर कोने पर एक-एक सुपारी रखें.
- जिस जगह पर गणपति की स्थापना की हैं वहां से उन्हें उठाकर इस पटरे पर रखें.
- गणेश जी को विराजमान करने के बाद पटरे पर फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा और पांच मोदक रखें.
- अब एक छोटी लकड़ी लेकर उसमें चावल, गेहूं और पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधें. साथ ही सिक्के भी रखें. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि यात्रा के दौरान गणपति को किसी तरह की परेशानी न हो.
- नदी या तालाब में गणपति का विसर्जन करने से पहले फिर से उनकी आरती करें.
- आरती के बाद गणपति से प्रार्थना करें और आपकी जो भी मनोकामना उसे पूर्ण करने का अनुरोध करें. साथ ही जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें.
विसर्जन के दिन परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ मिलकर आरती करनी चाहिए. आरती में गणपति - दीप, फूल, धूप, सुगंध और नैवेद्य आदि चढ़ाए जाते हैं. आरती करने के बाद भगवान गणेश को भोग लगाए. भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों के बीच बांट दिया जाता है.
आपको बता दे श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने लिखा था. 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है. तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था. इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है
इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया. यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई. माटी झरने भी लगी. तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा. इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है.
Updated on:
12 Sept 2019 12:56 pm
Published on:
12 Sept 2019 12:54 pm
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