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राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा की एंट्री से पहले गहलोत के तीखे तेवरों ने बढ़ाई आलाकमान की टेंशन

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से निकाली जा रही भारत जोड़ो यात्रा के अगले माह के पहले सप्ताह में राजस्थान में एंट्री से पहले ही गहलोत कैंप और सचिन पायलट कैंप के तीखे तेवर है।

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Gehlot Vs Pilot

जयपुर. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से निकाली जा रही भारत जोड़ो यात्रा के अगले माह के पहले सप्ताह में राजस्थान में एंट्री से पहले ही गहलोत कैंप और सचिन पायलट कैंप के तीखे तेवर है। इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर एक बार फिर सचिन पायलट को खुलेआम गद्दार और नकारा बताए जाने के मामले ने भी प्रदेश का सियासी पारा गरमा दिया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आक्रामक और तीखे तेवरों ने अब पार्टी आलाकमान की भी टेंशन बढ़ा दी है,एक ओर जहां पार्टी के तमाम नेताओं की ओर से कांग्रेस शासित प्रदेश होने के चलते राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के अभूतपूर्व स्वागत के दावे किए जा रहे हैं तो वही दोनों खेमों के बीच बढ़ते टकराव ने पार्टी थिंक टैंक को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की है कि जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट कैम्प के बीच तकरार चल रही है उसका संदेश जनता में अच्छा नहीं जा रहा है।

सरदारशहर उपचुनाव पर भी पड़ सकता है असर

कांग्रेस गलियारों में चर्चा इस बात की है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रही बयानबाजी और टकराव का असर सरदारशहर उपचुनाव पर ही पड़ सकता है जहां विपक्षी पार्टियां गहलोत- पायलट कैंप के बीच चल चल रहे टकराव के मामले को उपचुनाव में भुनाने की तैयारी में है और जनता में भी संदेश देना चाहते हैं कि और कांग्रेस पार्टी और सरकार में पिछले 4 साल से काम की बजाए केवल आपसे झगड़े ही होते रहे हैं।

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डैमेज कंट्रोल में जुटी पार्टी

इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से सचिन पायलट पर तीखे हमले करने के बाद सचिन पायलट कैंप ने भी आक्रमक रुख अपनाया हुआ है, सचिन पायलट कैम्प के माने जाने वाले मंत्री राजेंद्र गुढ़ा और खुद सचिन पायलट ने भी मुख्यमंत्री के बयानों के प्रति नाराजगी जाहिर की है और उन्हें संयम की भाषा बोलने की नसीहत दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सचिन पायलट और अशोक के बीच और तीखे शब्द बाण चलेंगे।

इसी को देखते हुए पार्टी आलाकमान अब डैमेज कंट्रोल के मूड में हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से कोई संदेशवाहक राजस्थान भेजा जा सकता है जो दोनों के बीच सामंजस्य और तालमेल की बात कर सके।पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश की ओर से भी गुरुवार रात इस तरह के संकेत दिए गए थे सचिन पायलट कैंप और गहलोत कैंप के बीच सुलह कराई जाएगी।

गौरतलब है कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच लंबे समय से अदावत चली आ रही है। गुरुवार को सचिन पायलट जहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए तो वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में सचिन पायलट को गद्दार और निकम्मा करार दिया था और कहा था कि सचिन पायलट किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री स्वीकार नहीं होंगे अगर पार्टी आलाकमान को मुख्यमंत्री भगत बनाना है तो 102 विधायकों में से मुख्यमंत्री बनाया जाए। सचिन पायलट की गद्दारी की वजह से सरकार बचाने के लिए 38 दिन बाड़ेबंदी में रहना पड़ा था।

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गहलोत के संकटमोचक अब पायलट के साथ

इधर सियासी संकट के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा और वाजिब अली अब बदली परिस्थितियों में सचिन पायलट कैंप में शामिल हो गए हैं,साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं जबकि इन्हीं नेताओं ने सियासी संकट के दौरान पायलट कैम्प पर सबसे ज्यादा ज्यादा हमले बोले थे।

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