
ghanshyam tiwari
अरविन्द सिंह शक्तावत
जयपुर. भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार ब्राह्मण चेहरे की तलाश पूरी कर ली है। लंबे समय तक जनसंघ और भाजपा में काम करने वाले घनश्याम तिवाड़ी को फिर से मुख्य धारा में लाया गया है। तिवाड़ी को भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर एक साथ कई संदेश दे दिए हैं।
74 वर्ष से ज्यादा उम्र के तिवाड़ी का लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वे करीब 45 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। संसदीय मामलों के जानकारों में तिवाड़ी की गिनती रही है। भाजपा की सरकारों में मंत्री भी रहे। चिकित्सा, शिक्षा जैसे महकमे भी संभाले, लेकिन वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री के दूसरे काल से पहले ही तिवाड़ी और राजे की अनबन शुरू हो गई। राजे 2013 में सीएम बनी और तिवाड़ी सांगानेर से विधायक। वरिष्ठता के आधार पर मंत्री पद पर दावेदारी भी हुई, लेकिन राजे से अनबन के चलते तिवाड़ी को मंत्री नहीं बनाया गया। नाराज तिवाड़ी ने राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और खुलकर सामने आ गए। राजे से अनबन के चलते उन्होंने कई बार पीएम नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को भी आड़े हाथों लिया, लेकिन पार्टी ने तिवाड़ी को नहीं निकाला। आखिरकार जून 2018 में तिवाड़ी ने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पार्टी से त्याग पत्र दे दिया।
चुनाव लड़े, जमानत हो गई जब्त
त्याग पत्र देने के बाद तिवाड़ी ने अपनी पार्टी बनाई। सांगानेर से भारत वाहिनी पार्टी के सिंबल पर 2018 में चुनाव लड़े, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई। लोकसभा चुनाव के समय वे कांग्रेस में चले गए, लेकिन वहां भी महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया। आखिरकार उन्होंने 2020 की शुरुआत में भाजपा आलाकमान को एक मार्मिक पत्र लिखा। इसके बाद संघ के राजस्थान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से उनकी घनिष्ठता काम आई। दिसम्बर 2020 में उन्हें फिर से भाजपा में शामिल कर लिया गया। तिवाड़ी को उसके बाद भी कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई। पार्टी लंबे समय से किसी ब्राह्मण चेहरे की तलाश में थी, जिसे आगे बढ़ाना था। आखिरकार घूम फिर कर पार्टी नेताओं को तिवाड़ी पर ही विश्वास जताना पड़ा। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बना दिया। ऐसा माना जा रहा है कि तिवाड़ी को आगामी दिनों में संगठन में भी कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
पार्टी छोड़ने से लेकर पार्टी में शामिल होने तक का सफर
- भारत वाहिनी पार्टी का गठन- 2 अप्रेल, 2018
- भाजपा से त्याग पत्र दिया- 25 जून, 2018
- कांग्रेस में शामिल - 25 मार्च, 2019
- भाजपा में फिर से शामिल - 12 दिसम्बर, 2020
चारों सांसदों में से किसी को नहीं मिला फिर से मौका
राज्यसभा की जिन चार सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इन चारों पर भाजपा के ही राज्यसभा सांसद हैं। ओम प्रकाश माथुर, हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर, के जे अल्फोंस और रामकुमार वर्मा राज्यसभा सांसद हैं और इनका जुलाई के प्रथम सप्ताह में कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन चारों सीटों पर ही फिर से चुनाव हो रहा है, लेकिन पार्टी ने वर्तमान चारों सांसदों में से किसी को मौका नहीं दिया और बहुमत के आधार पर एक सीट जिस पर जीत तय है। उस सीट पर घनश्याम तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाया है।
Published on:
30 May 2022 09:24 am
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