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अब गांवों में निजी जमीनों पर भी लगेंगे सरकारी हैंडपम्प, ट्यूबवैल

सरपंचों को साधने का प्रयास...

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Jaipur News

जयपुर . गांवों में पेयजल के लिए अब निजी भूमि पर भी सरकारी हैंडपम्प, ट्यूबवैल लगाए जा सकेंगे। रूठे सरपंचों को साधने के प्रयास में सरकार ने इसके लिए सशर्त अनुमति दे दी है। पहले निजी भूमि पर ऐसा सार्वजनिक कार्य नहीं कराया जा सकता था। अब प्रदेश की 9891 ग्राम पंचायतों में निजी भूमि पर सार्वजनिक कार्य कराने का रास्ता खुल गया है।

उठ रहे सवाल
इधर पंचायत राज व ग्रामीण विकास के सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता आरपी चौधरी का कहना है कि निजी भूमि पर सार्वजनिक कार्य नहीं हो सकते। इसमें स्पष्ट प्रावधान यह करना चाहिए कि निर्माण शुरू होने से पहले ही स्वामित्व पंचायत के नाम हो। सिर्फ स्टाम्प पर लिखकर देने से भूमि समर्पित नहीं होगी। वहीं एडवोकेट संदीप कलवानिया का कहना है कि सरकार के इस फैसले से गांवों में झगड़े बढऩे की आशंका है। एेसे अधिकतर मामलों में जनता की बजाय व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचता है। पहले भी एेसे कई मामलों में विभागीय कार्रवाई हुई है।

नाराज थे सरपंच

सरपंचों को वोट बैंक की अहम कड़ी माना जाता है लेकिन अपनी मांगों को लेकर सरपंच संघ पिछले कई माह से नाराज था। ऐसे में सरकार का यह उन्हें मनाने का प्रयास माना जा रहा है।

ये रहेंगी प्रमुख शर्तें

- निजी भूमि मालिक को 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर राज्य सरकार के पक्ष में सहमति पत्र देना होगा।
- भूमि मालिक उपलब्ध कराई भूमि के बारे में कोई शर्त नहीं लगाएगा।
- समर्पित भूमि पर चारदीवारी नहीं होगी।
- पेयजल स्रोत तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता होगा।
- कार्य के पेटे राशि व्यय करने से पहले भूमि का स्वामित्व ग्राम पंचायत के नाम कराने का दायित्व पंचायत के सचिव और सरपंच का होगा। इसके बाद ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होगा।
- व्यय राशि की पूरी जिम्मेदारी सरपंच व सचिव की होगी।

मिलता ही नहीं था जमीन का हक

उपहार में जमीनें लेकर सार्वजनिक कार्य कराने का प्रावधान पहले भी था। लेकिन पिछले वर्षों में कई मामले सामने आए, जिनमें भूमि का स्वामित्व पंचायत के हक में हो ही नहीं पाया या इसमें लम्बा समय लगा। एेसे में हैंडपम्प, ट्यूबवैल या अन्य सार्वजनिक सम्पत्ति पूरी तरह निजी बन गई। धन का दुरुपयोग हुआ, सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।

9 हजार से अधिक लंबित मामले

सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार दिसम्बर 2016 तक पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायतों में पद के दुरुपयोग और नियम विरुद्धनिर्माण जैसे 9 हजार से अधिक मामले लम्बित हैं।

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