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सुविधाएं देना मुश्किल नहीं, बाधा यह है कि इस पर ध्यान ही नहीं

बस स्टैंडों की दुर्दशा

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government bus stand

जयपुर . राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर की चारों दिशाओं में बस स्टैंड बनाने के लिए बजरी की समस्या दूर करने का रास्ता निकालने के निर्देश दिए हैं। लेकिन जयपुर की हालत भी कोई ज्यादा ठीक नहीं है। बड़ा उदाहरण नारायण सिंह सर्किल स्थित लाल बस स्टैंड है। शहर में सिंधी कैंप के बाद यह सबसे व्यस्त बस स्टैंड है लेकिन इसकी भी हालत खराब है। यहां रोजाना 250 बसें आती-जाती हैं मगर बैठने को जगह तक नहीं है। यात्री सड़क पर बैठने को मजबूर होते हैं। पचास से अधिक निजी वाहन भी यहां से सवारियां बैठाते हैं। बसों के कारण लगभग हर 2 मिनट में जाम लगता है, जिससे शहरवासी भी परेशान होते हैं। जिस जगह यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। यहां सुविधाएं मुहैया कराना मुश्किल नहीं है लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां सक्रिय नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाए सरकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर की चारों दिशाओं में अलग-अलग बस स्टैंड के लिए चिह्नित भूमि पर शुरू किए गए निर्माण को पूरा करने में आडे़ आ रही बजरी समस्या से निपटने के लिए सरकार को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग व न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ ने नए बस स्टैंड बनने तक यातायात पुलिस को निजी बसों के अवैध ठहराव को नियंत्रित करने का आदेश दिया है।

यह कहा था याचिकाओं में

शहर में निजी बस ऑपरेटर्स की ओर से जगह-जगह ठहराव कर सवारियां भरने व यातायात अस्त-व्यस्त कर देने की समस्या से निजात पाने के लिए जैसलमेर , बाड़मेर, बीकानेर व पाली मार्ग पर जनसुविधाओं सहित अधिकृत बस स्टैंड का निर्माण को लेकर तीन जनहित याचिकाए दायर की गई थीं। प्रशासन ने चार जगह बस स्टैंड के लिए जमीनें आवंटित की, जहां निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए। वर्क आॉर्डर भी जारी कर दिए लेकिन जेडीए के अधिवक्ता सुनील पुरोहित ने बताया कि बजरी की अनुपलब्धता के चलते निर्माण बंद है। इस पर खंडपीठ ने सरकार के नाम से निर्देश जारी करते हुए याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।

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