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जयपुर बर्ड फेस्टिवल-2026: सांभर-नालियासर,मेनार में परिंदों की दुनिया से रूबरू हुए पक्षीप्रेमी

जयपुर बर्ड फेस्टिवल-2026 के दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों का फील्ड विजिट कर प्रकृति और परिंदों से सीधा संवाद स्थापित किया।

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जयपुर बर्ड फेस्टिवल

जयपुर। जयपुर बर्ड फेस्टिवल-2026 के दूसरे दिन रविवार को प्रतिभागियों ने प्रदेश की प्रमुख आर्द्रभूमियों का फील्ड विजिट कर प्रकृति और परिंदों से सीधा संवाद स्थापित किया। इस दौरान सांभर साल्ट लेक, नालियासर, बरखेड़ा-चंदलाई-मुहाना क्षेत्र, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर), तालछापर अभयारण्य (चूरू) और मेनार जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड्स में बर्ड वॉचिंग गतिविधियां आयोजित की गईं।

रविवार को आयोजित इस फील्ड विजिट में पद्मश्री सम्मानित फोटोग्राफर अनूप साह, ग्रीन पीपल सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर, प्रतापसिंह चूंडावत, पक्षी विशेषज्ञ वीरेंद्र सिंह बेड़सा, निर्मल मेनारिया, बटरफ्लाई एक्सपर्ट मुकेश पंवार, पुष्पा खमेसरा, शरद श्रीवास्तव, बाशोबी भटनागर सहित अनेक पक्षीप्रेमी और पर्यावरणविद् शामिल हुए।

सांभर झील के मध्य तक पहुंची ‘बग्गी ट्रेन’

प्रतिभागियों ने नालियासर और सांभर साल्ट लेक का भ्रमण किया। सांभर झील के मध्य क्षेत्र तक पहुंचने के लिए छोटी ट्रेननुमा ‘बग्गी’ का उपयोग किया गया, जहां स्थानीय गाइड के अनुसार झील क्षेत्र में 20 हजार से अधिक पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। झील में हजारों पक्षियों को एक साथ विचरण करते देख प्रतिभागी अभिभूत नजर आए। इस दौरान 50 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी और स्थानीय पक्षी देखे गए, जिनमें फ्लेमिंगो, पेलिकन, ग्रेलेग गूज, बार-हेडेड गूज, स्पूनबिल, एवोसेट, किंगफिशर, कॉरमोरेंट और विभिन्न प्रजातियों के सैंडपाइपर प्रमुख रहे।

राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

फेस्टिवल के तहत कानोता कैंप रिजॉर्ट, जामडोली में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें पक्षियों-विशेषकर रेप्टर्स और आउल-के संरक्षण के साथ-साथ देश और प्रदेश की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की चुनौतियों पर विचार–विमर्श हुआ।

अभिनेता राहुल सिंह ने की फेस्टिवल में शिरकत

बॉलीवुड अभिनेता राहुल सिंह ने फेस्टिवल में शिरकत कर युवाओं से पक्षी एवं पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि सांभर और नालियासर जैसी आर्द्रभूमियां जैव विविधता की रीढ़ हैं और इनके संरक्षण से ही पक्षियों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

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