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सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने बदली स्कूल की तस्वीर

शिक्षक दिवस विशेष  

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Sep 05, 2021

सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने बदली स्कूल की तस्वीर

सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने बदली स्कूल की तस्वीर


राखी हजेला

शिक्षक चाह जाएं तो स्कूल का माहौल बदल सकता है। ऐसा ही कुछ प्रयास किया राजधानी के बीचों बीच स्थित एक सरकारी स्कूल की संस्था प्रधान ने और उसमें सहयोग दिया उनके शिक्षकों ने। सभी ने मिलकर स्कूल की तस्वीर ही बदल दी। स्कूल और शिक्षा व्यवस्थाओं सुधारने के जुनून के साथ इन्होने सरकारी स्कूल का कायाकल्प ही कर दिया। यह स्कूल है गांधी नगर स्थित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम सीनियर सैकेंडरी स्कूल। इस स्कूल के हर कैमरे में ना केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हुए बल्कि बरसात के पानी का संरक्षण करने के लिए रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाया गया है। यहां टीचर्स की अटैंडेंस भी बायोमेट्रिक मशीन से होती है। स्कूल की प्रिंसिपल कुमुद शर्मा और यहां के शिक्षकों कोविड काल इन दो सालों में एक सरकारी स्कूल को निजी स्कूलों से कहीं आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। यही वजह है कि स्कूल में एडमिशन के लिए कतार लगी रहती है। शिक्षक दिवस पर एक रिपोर्ट:
हर क्लासरूम में सीसीटीवी
निजी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होना कोई अचरज की बात नहीं लेकिन अगर हमें पता चले कि किसी सरकारी स्कूल में भी सीसीटीवी कैमरे हैं तो आश्चर्य होगा ही। मुख्यमंत्री जन सहभागिता योजना के तहत 16 और भामाशाहों की मदद से 8 सीसीटीवी कैमरे यहां लगाए गए हैं। स्कूल में रेन वॉटर हावेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है।
पेड़ पौधे लगाए, पानी की व्यवस्था करवाई
स्कूल की दशा सुधारने के लिए पहले पढ़ाई का माहौल बनाया गया इसके बाद शुरू हुआ स्कूल में बदलाव का दौर। स्कूल में पानी की व्यवस्था तो थी लेकिन लगता था सालों से साफ सफाई ही नहीं हुई हो। पानी के नल इतने ऊंचे लगे थे कि छोटे बच्चों के लिए वहां तक पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में इसे तोड़ कर दोबारा बनाया गया। छोटे बच्चों के लिए यहां अलग से नल लगवाए गए जिससे उनकी परेशानी खत्म हुई।
भामाशाहों की मदद के साथ खुद भी लगाए पैसे
पूरे स्कूल का रिनोवेशन किया गया। इस काम में भामाशाहों की मदद तो ली ही गई साथ ही स्कूल की संस्था प्रधान कुमुद शर्मा और शिक्षक भी पीछे नहीं रहे। स्कूल में एक दानपेटिका रखवाई गई, जिसमें सभी अपने वेतन में से थोड़े थोड़े पैसे बचाकर रखने लगे। किसी शिक्षक का जन्मदिन हो या फिर शादी की वर्षगांठ या फिर परिवार में कोई खास अवसर, शिक्षक इन दानपेटिका में अपनी मर्जी से पैसे डालने लगे, जिसका उपयोग स्कूल के निर्माण कार्य में किया गया। विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए स्कूल में पौधे लगाए गए जिससे स्कूल में हर तरफ हरियाली फैली हुई है।
आयु वर्ग के मुताबिक अलग टॉयलेट्स
स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए अलग अलग टॉयलेट्स तैयार करवाए गए हैं। छोटे बच्चों के लिए अलग तो बड़े विद्यार्थियों के अलग टॉयलेट्स बनवाए गए। इस काम में रोटरी क्लब से स्कूल का सहयोग किया। टॉयलेट रूम में पानी की भी व्यवस्था इस प्रकार से की गई है कि टॉयलेट्स कभी गंदे नहीं रहे। स्टूडेंट्स के हाथ धोने के लिए भी पानी की व्यवस्था की गई है। स्कूल के कबाड़ में पड़े सालों पुराने पंखों की सफाई करवाकर उन्हें इस्तेमाल किया गया। स्कूल भवन के रंग.रोगन से सूरत बदलने के साथ ही दीवारों पर आकर्षक ढंग से बालिका शिक्षा,पर्यावरण,शिक्षा, स्वास्थ्य व स्वच्छता संबंधी संदेश अंकित किए गए।
मे आई हेल्प यू से मदद को तैयार शिक्षक
स्कूल के मुख्य भवन कॉर्डिनेटर रूम तैयार किया गया है जिसमें मे आई हेल्प यू की एक विंडो बनाई गई, जिसमें स्कूल समय में शिक्षक हमेशा अभिभावकों और स्टूडेट्स की मदद के लिए तैयार रहते हैं। स्कूल के स्टोर में पिछले 70 साल से पड़े हुए कबाड़ को हटाकर नया रिकॉर्ड रूम बनाया गया जिसमें स्कूल का 1952 से लेकर आज तक का रिकॉर्ड अलमारियों में सेशन के मुताबिक लेबल कर सुरक्षित कर रखा गया है।
लाइब्रेरी के साथ कम्प्यूटर लैब की सुविधा भी
स्कूल में विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है और एक नई लाइब्रेरी का निर्माण कार्य चल रहा है। साथ ही प्रोजेक्टर के साथ कम्प्यूटर सिस्टम भी भामाशाहों की मदद से लिए गए है। बिजली जाने पर पढ़ाई बाधित नहीं हो इसलिए यूपीएस की व्यवस्था भी की गई है। खास बात यह है कि स्कूल के बदलते स्वरूप को देखते हुए अभिभावक भी मदद के लिए आगे आने लगे हैं। कोई पेड़ पौधों की व्यवस्था करता है तो कोई खाद, बीज की। हाल ही में स्कूल में विद्यार्थियों के लिए झूले और फिसलपट्टी भी लगाई गई है।
इनका कहना है,
जिस स्थान पर हम काम करते हैं उसे यदि अपना मान कर काम किया जाए तो बदलाव संभव है। जब मैंने इस स्कूल का कार्यभार संभाला तो मन में चाह थी कि जहां काम कर रही हूं उस स्थान के लिए कुछ कर सकूं। इसी सोच के साथ प्रयास किया, स्टाफ ने भी मदद की और परिणाम सामने हैं।

कुमुद शर्मा, प्रिंसिपल
महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम सीनियर सैकेंडरी स्कूल

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