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प्रोटीन के लिए सेवन करें मीठा करेला

मीठा करेला की सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही बहुत ही ताकतवर मानी जाती है। इसमें मीट से पचास गुना ज्यादा ताकत एवं प्रोटीन पाया जाता है। सेहत के लिए सौगात कहे जाने वाली यह सब्जी वनों में अपने आप उग जाती है। मीठा करेला को वन करेला, कंटीला परवल या कंटोला भी कहते हैं। अन्य सब्जियों की तुलना में महंगी होती है। मण्डियों में सौ से डेढ़ सौ रुपए किलो बिकती है।

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मानसून में उगने वाली सौगात
जंगलों में स्वत: ही उगने के कारण इसे वन करेला या जंगली करेला कहते हैं। बारिश के बाद पके हुए वन करेला के बीज जमीन पर गिर जाते हैं। अगले साल बारिश के साथ ही बीज अंकुरित हो जाते हैं। इसकी बेल झाडिय़ों या बाड़ के सहारे फैलती है। व्यावसायिक खेती करने वाले लोग रस्सी के सहारे बेल को फैलाते हैं। कंटोला मानसून सीजन में ही उगता है।

पके करेले से तैयार करें बीज
इसके बीज काफी महंगे होते हैं। छोटे स्तर पर खेती करने वाले किसानों को पके वन करेला से ही बीज तैयार करने चाहिए। बड़े स्तर पर खेती करने वाले किसान हाइब्रिड बीज उपयोग में ले सकते हैं। बीजों को गर्म पानी में भिगोने के 12 घंटे बाद बीजोपचार करें और फिर बुवाई करें।

कई रोगों में लाभकारी
कंटोला अथवा मीठा करेला को सब्जियों में सबसे सेहतमंद और ताकतवर सब्जी माना जाता है। मीठा करेला में विटामिन, प्रोटीन एवं फाइबर होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय और नेत्र रोग के समय कंटोला का सेवन लाभकारी होता है। दरअसल, इसमें विटामिन-ए पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी में सुधार के लिए बहुत ही जरूरी होता है। इसके अलावा इसकी सब्जी मधुमेह, पाचन तंत्र, खांसी, पथरी, मोटापा, उच्च रक्तचाप आदि रोगों में भी लाभ पहुंचाती है। इसमें मुख्य रूप से बीटा कैरोटीन, ल्यूटिन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। इससे त्वचा का ग्लो बढऩे में मदद मिलती है। यह एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक के गुणों से भरपूर होता है, इसीलिए इसे खांसी के लिए लाभकारी माना जाता है।