जयपुर. जब एक कवि का हृदय किसी मूर्ति के लिए इतना बेचैन हो उठे कि एक पूरी किताब उसके नाम कर दे, तो यकीनन या तो मूर्ति खास है या फिर कवि, पर किसी एक के खास होने से इतने गहरे शब्द कहां प्रस्फुटित होते हैं, यकीनन दोनों ही खास हैं, यहां मूरत दीदारगंज की यक्षी की है, तो कवि का नाम विनय कुमार है। कवि की एक खूबी यह भी है कि वे कि वे मनोचिकित्सक हैं, पर न जाने मन की पढ़ाई करते हुए, उन्होंने किस किताब से कौनसा अध्याय पढ़ लिया कि मूरत का मन पढऩे लगे।