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राजस्थान में पर्यटन को उद्योग का दर्जा-फायदा सिर्फ 10 प्रतिशत बडे़ होटलों को ही

होटल एसोसिएशन के पदाधिकारी बोले- नियम ऐसे बनाए कि 80 प्रतिशत बजट होटल फायदे के दायरे से बाहर

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estaurants and hotels: सरकार के फैसले से सस्‍ता हुआ रेस्‍टोरेंट में खाना

estaurants and hotels: सरकार के फैसले से सस्‍ता हुआ रेस्‍टोरेंट में खाना

जयपुर.

राजस्थान में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की सरकार की घोषणा विवादों में घिर गई है। क्योंकि उद्योग के दर्जे की रियायतें लेने के लिए पर्यटन विभाग के अफसरों ने नियमों का ऐसा तानाबाना बुना कि 80 प्रतिशत बजट होटल उद्योग के दर्जे का फायदा लेने से लगभग बाहर हो गए हैं। होटल एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हुसैन खान ने बताया कि उद्याेग के दर्जे का लाभ महज 10 प्रतिशत बड़े होटल ही उठा रहे हैं। क्योंकि जो नियम बनाए गए हैं उनको पूरा करना बजट होटलों के लिए मुश्किल है। राजस्थान में 80 प्रतिशत पर्यटक बजट होटलों में ही ठहरते हैं। खान ने कहा कि अगर सरकार बजट होटलों को लाइसेंस जारी करे, भू-उपयोग परिवर्तन करे तो सरकार को 200 करोड़ का राजस्व भी प्राप्त होगा। खान ने बताया कि अगर नियमों में बदलाव नहीं किया गया तो बजट होटल तो उद्ययोग के दर्जे की रियायतें कभी ले ही नहीं सकेंगे। वहीं बडे़ होटलाें के सामने कोई आर्थिक संकट भी नहीं रहता है। जबकि बजट होटलों की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं रहती है।
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नियमों के फेर में इस तरह दायरे से बाहर हुए बजट होटल
- नगर निगम का लाइसेंस होना चाहिए
लाइसेंस सभी होटल लेना चाहते हैं लेकिन नगर निगम नहीं देता

- होटल में 2 करोड़ का निवेश और 20 कमरे होना जरूरी

निगम ने 10, 20 और 30 कमरों की अलग-अलग शुल्क श्रेणी बना रखी है
- न भू-उपयोग परिवर्तन किया जा रहा है और न ही निगम फायर एनओसी जारी कर रहा है
होटल 50 से ज्यादा वर्षों से अलग-अलग शहरों में चल रहे हैं

- जीएसटी नंबर होना जरूरी
20 लाख से कम टर्न ओवर होने पर जीएसटी नंबर की जरूरत नहीं