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बढ़ते कृषि निर्यात से ग्रामीण आजीविका में सुधार

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बढ़ते कृषि निर्यात से ग्रामीण आजीविका में सुधार

नई दिल्ली. पिछले कुछ सालों में भारत से कृषि निर्यात में वृद्धि हुई है और 2021-22 में यह बढ़कर 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया। इस रुझान ने भारतीय किसानों को ऊंची आय के साथ बेहतर संभावनाएं प्रदान की है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे मौजूदा तनाव और कोविड-19 महामारी फैलने के कारण भारत के लिए अपने अतिरिक्त और सतत कृषि उत्पादन के साथ अनेक अवसर उत्पन्न हुए हैं। कृषि उत्पाद के निर्यात द्वारा किसानों को मिलने वाली उच्च आय ग्रामीण आजीविका में सुधार करने में सक्षम है क्योंकि देश की आधी से ज्यादा आबादी अपनी रोजी-रोटी के लिए कृषि एवं सहयोगी गतिविधियों पर आश्रित है।
मल्लिका वर्मा, डायरेक्टर, सरकारी मामले, फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया ने कहा, भारतीय कृषि एवं खाद्य क्षेत्र को विश्व के बाजारों में अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। किसानों द्वारा खेती और कृषि मार्केटिंग के पारंपरिक तरीकों को बदले जाने की जरूरत है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांगों के अनुरूप गैर-पारंपरिक फसलें उगानी होंगी। विश्व में दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादक देश होने के बावजूद भारत दशकों से काफी कम निर्यात करता आया है। निर्यात बढ़ाने के लिए भारत सरकार के सतत प्रयासों के बल पर हम सन 2019 में सर्वोच्च 10 निर्यातक देशों की सूची में शामिल हो पाए। भारत में कई फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ रही हैं, और देश चावल, गेहूं, कपास, गन्ना, और बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक देश बन रहा है। भारत कृषि जलवायु की अपनी विविध परिस्थितियों और श्रम की कम लागत के चलते अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा पुख्ता स्थिति में है।