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मासूम बहशी से नहीं बच सकी, लेकिन मौत के बाद सबूत दे गई, कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

बालिका से बलात्कार के बाद हत्या की दरिंदगी के सबूत देख कोर्ट ने कहा आरोपी की मौत होने तक फांसी पर लटकाया जाए

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जयपुर.
झालावाड़ जिले के एक गांव में एक नाबालिग की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में पोक्सो कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश ने सोमवार को आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। न्यायाधीश वर्मा ने अभियुक्त लालचन्द को धारा 302 केअपराध का दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजासुनाई । जिसमें बताया कि अभियुक्त की गर्दन में फंदा लगाकर तब तक लटकाया जाएं जब तक की उसकी मृत्यु नहीं हो जाती है। अभियुक्त को 20 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रदेश में मासूमों से बलात्कार के मामलों में आठ लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया के चलते अभी तक एक भी आरोपी को फांसी पर नहीं लटकाया जा सका।

यूंं मिले आरोपी के खिलाफ सबूत

पुलिस व एफएसएल टीम को मृतक बालिका के हाथों में कुछ बाल मिले। आशंका जताई गई कि आरोपी से बचने के लिए बालिका ने उसके बाल नौंच लिए। इससे दो तीन बाल बालिका के हाथ में चिपके मिले। आरोपी पकड़ा गया, तब बालिका के हाथों में मिले बालों से उसकी डीएनए जांच करवाई गई। एफएसएल निदेशक अजय शर्मा ने बताया कि डीएनए में पुष्टि हुई कि बालिका के हाथों में आरोपी के ही बाल थे।

इन्होंने बताया

लोकअभियोजक रामहेतार गुर्जर नेबताया कि जिले में दो वर्ष पूर्व आरोपी लालचन्द बैरागी ने एक नाबालिग बालिका की बलात्कार के बाद हत्या कर कट्टे में भरकर मकान का ताला लगाकर निकल गया था। इसमामले में थाना सदर में मामला दर्ज हुआथा। सोमवारको इस मामले में पोक्सो कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश प्रदीप कुमार वर्मा ने आरोपी लालचन्द बैरागी निवासी नयागांव सोयतकला मध्यप्रदेश को धारा 376 एबी, 377,302, 201 व पोक्सो एक्ट में दोषसिद्ध करार देकर फांसी की सजा सुनाई।