जयपुर आयुक्तालय पुलिस रामगंज में जास्मिन (घोड़ी) तो गोविंद देव मंदिर के आस-पास चंदन (घोड़े) से संदिग्धों पर नजर रख रही है। आयुक्तालय पुलिस ने वर्षों बाद परकोटा व आस-पास के क्षेत्र व भीड़-भाड़ वाले इलाकों में शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक घोड़ों से गश्त करने की व्यवस्था फिर से शुरू की है। पुलिस लाइन स्थित घुड़शाला से रोज कभी 6 तो कभी 8 घोड़े गश्त के लिए निकलते हैं, जो आगे जाकर दो-दो की टीम में अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर निगरानी रख रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राहुल प्रकाश ने बताया कि घोड़े से गश्त करने पर पुलिसकर्मी को संदिग्धों पर नजर रखने में काफी मदद मिलती है। भीड़ में खड़ा पुलिसकर्मी अपने आस-पास के कुछ दूरी तक के क्षेत्र में नजर रख सकता है। लेकिन घोड़े पर सवार पुलिसकर्मी दूर तक भीड़ में संदिग्धों पर नजर रख सकता है। परकोटा में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पुलिस का वाहन नहीं पहुंच सकता। ऐसे में इन घोड़ों से वहां भी पहुंचा जा सकता है। घुड़शाला के हेड़ कांस्टेबल राजकिरण का कहना है कि एक घोड़े से 1500 से 2000 लोगों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। राजकिरण ने बताया कि पुलिस के घोड़े प्रशिक्षित हैं। भीड़ में किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन जरूरत पडऩे पर उत्पातियों को दुलाती (लात) मारने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने बताया कि जुलूस, धरना-प्रदर्शन, रैली और सभाओं के दौरान घुड़सवार की ड्यूटी लगने वाले दिन गश्त नहीं की जाती। शुक्रवार को जन्माष्टमी पर्व पर निकलने वाली शोभायात्रा में छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़ और गोविंद देव मंदिर के बाहर घुड़सवार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी है। परकोटा व उसके आस-पास के क्षेत्र को चार भागों में विभक्त किया गया है। चार में से तीन क्षेत्रों में घोड़ों से रोज गश्त की जा रही है। क्षेत्र बदलते हुए भी घुड़सवार पुलिसकर्मियों को भेजा जाता है। इसके अलावा जनपथ पर विधानसभा और इसके आस-पास के क्षेत्र में घुड़सवार पुलिसकर्मी गश्त करते हैं। स्पीडो, बोर्डरमैन, रानी, कोहीनूर, नकुल, लक्ष्य, डेविड, अक्षिता, जास्मिन, श्वेता, रीना, सुनीता, रवि, चंदन, सुखदेव और लिल्ली
फैक्ट फाइल:
– आयुक्तालय में घोड़ों की स्वीकृत नफरी – 22
– वर्तमान में घोड़ों की नफरी – 16
– वर्तमान में बोर्डरमैन घोड़ा अयोग्य
– स्पीडो, रानी व नकुल नाम के घोड़े आगामी तीन से चार माह में 22 वर्ष की उम्र होने पर सेवानिवृत्त हो जाएंगे