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Jaipur Bomb Blast: आरोपियों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी शर्तें, अंतिम सुनवाई की तारीख तय

हाईकोर्ट के आदेश पर आंशिक रोक, सुप्रीम कोर्ट बोला, आरोपी बाहर आए तो राज्य हित कैसे सुरक्षित होगा, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई रोकी, विस्फोट के आरोपी बाहर आए तो रोज एटीएस में देनी होगी हाजिरी

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जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर बम विस्फोट मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर आंशिक रोक लगाते हुए जांच में लापरवाही के आरोप झेल रहे पुलिसकर्मियों को राहत दी है। वहीं बम विस्फोट के आरोपियों को लेकर कहा है कि आरोपी बाहर आ गए तो राज्य हित कैसे सुरक्षित रहेगा। ऐसे में जेल से बाहर आने पर भी आरोपियों को रोजाना सुबह 10 से 12 बजे के बीच एटीएस के दफ्तर में हाजिरी देनी होगी।

कोर्ट ने मामले को गभीरता से लेते हुए 9 अगस्त को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है, वहीं सैफ और सैफुर्रहमान को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। केविएट दायर करने वाले तीन आरोपी सुप्रीम कोर्ट में पहले ही आ चुके हैं।

न्यायाधीश अभय एस. ओका और न्यायाधीश राजेश बिंदल की खंडपीठ ने बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। बम विस्फोट प्रभावित परिवारों के दो सदस्यों की अपील को कोर्ट पहले ही सुनवाई के लिए स्वीकार कर चुका है। इन अपीलों में बम विस्फोट के अभियुक्तों को बरी करने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, वहीं सरकार की अपील में जांच में खामी को लेकर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को दिए आदेश को रद्द करने की गुहार भी की गई है।

9 अगस्त को सुनवाई नहीं तो आरोपियों को बंद रखने पर बहस
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्ण रोक लगाने से इंकार कर दिया, वहीं बम विस्फोट के आरोपियों पर कुछ कड़ी शर्तें लगाईं हैं। कोर्ट ने सुनवाई 9 अगस्त तक टालते हुए कहा कि यदि उस दिन सुनवाई नहीं होती है तो राज्य सरकार आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 390 के तहत आरोपियों को रिहा नहीं करने के बिंदु पर बहस करने के लिए स्वतंत्र होगी। माना जा रहा है कि मृत्युदंड का मामला होने के कारण इसे तीन सदस्यीय पीठ को भी सुनवाई के लिए भेजा जा सकता है।

यह भी निर्देश
- यदि बम विस्फोट के आरोपी किसी अन्य मामले में अंडरट्रायल/दोषी नहीं हैं तो उनके मामले में जमानत बांड की शर्तों का कड़ाई से पालन हो।
- मामले की जांच में खामी को लेकर पुलिस अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के हाईकोर्ट आदेश की पालना पर रोक।
- राज्य सरकार सैफ और सैफुर्रहमान को नोटिस तामील कराना सुनिश्चित करे।
- आरोपी अन्य मामलों में जमानत प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश का सहारा नहीं ले सकेंगे।
- राज्य सरकार ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और पेपरबुक पूरी कराने सहित अन्य दस्तावेजी तैयारी पूरी करवाए।

राज्य सरकार ने कहा, आरोपियों को छोड़ा नहीं जाए
राज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी व अधिवक्ता संदीप झा ने कहा कि आरोपियों को हाईकोर्ट के आदेश की पालना में छोड़ा नहीं जाए, क्योंकि इनको बड़ी मुश्किल से पकड़ा जा सका था। इनको छोड़ दिए जाने पर गायब होने का खतरा है। तीन आरोपी घटना के 14 साल बाद भी पकड़ में नहीं आ सके हैं। उधर, पीड़िता राजेश्वरी देवी और अभिनव तिवारी की ओर से अधिवक्ता हाजिर रहे।