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राजस्थान में इलेक्ट्रिकल, मोबाइल-कैमरों का हब जयपुर का इंदिरा बाजार, रोजाना करोड़ों का कारोबार

रेडीमेड गारमेंट्स लेने हो या इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान। सजावटी लाइट्स से लेकर मोबाइल, कैमरे तक इंदिरा बाजार में आसानी से उपलब्ध है।

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राजस्थान में इलेक्ट्रिकल, मोबाइल-कैमरों का हब जयपुर का इंदिरा बाजार, रोजाना करोड़ों का कारोबार

राजस्थान में इलेक्ट्रिकल, मोबाइल-कैमरों का हब जयपुर का इंदिरा बाजार, रोजाना करोड़ों का कारोबार

जयपुर। रेडीमेड गारमेंट्स लेने हो या इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान। सजावटी लाइट्स से लेकर मोबाइल, कैमरे तक एक ही बाजार में आसानी से उपलब्ध है, जी हां हम बात कर रहे है परकोटे से सटे इंदिरा बाजार की, जहां ग्राहकों की भीड़ हर समय देखी जा सकती है।

इंदिरा बाजार में जेंट्स रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रिकल सामान, सजावटी लाइट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स के आयटम, फुटवियर, प्लास्टिक आइटम के अलावा हार्डवेयर, गैस—चूल्हा आदि की कई दुकानें है, यहां मोबाइल—कैमरे व उनकी एसेसरीज का बड़ा बाजार है। व्यापारियों की मानें तो यह एक ऐसा बाजार है, जहां सबसे अधिक 576 दुकानें है। इसमें कपड़े की 150 दुकानें है, जहां सस्ते व महंगे कपड़े उपलब्ध है, दुकानों पर ग्राहक व दुकानदार के बीच मोल—भाव सुनने को आसानी से मिल जाता है। यहां लाइट्स के आयटम की 100 से अधिक दुकानें है, जहां से पूरे जयपुर में बिजली के सामान आपूर्ति हो रही है।

दोपहिया वाहन रिपेयरिंग का बड़ा बाजार
परकोटे से सटे बाजार में दोपहिया वाहन के पाट्र्स व रिपेयरिंग का सबसे बड़ा बाजार भी है, जहां दिनभर कारीगर वाहनों की मरम्मत करते नजर आते है।

बाजार में है 5 गार्डन
इंदिरा बाजार एक ऐसा बाजार है, जहां बाजार के बीच 5 गार्डन है, लेकिन नगर निगम की अनेदखी के चलते ये गार्डन बदहाल हो रहे है। न इनमें हरियाली है, न सुविधाएं है।

बाजार में खास—खास
576 दुकानें है बाजार में
100 करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है रोजाना बाजार में
96 कैमरे लगे है बाजार में

बाजार की समस्या
बाजार में बरामदें टूटे हुए है। व्यापारियों की मानें तो बरामदों की रिपेयर एक बार भी नहीं हुई, जिससे बारिश में बरामदे गिरने का डर बना रहता है।
अतिक्रमण बाजार की बड़ी समस्या है, यहां मुख्य सड़क पर भी अतिक्रमण हो रहा है।
अन्य बाजारों के जैसे बाजार में पार्किंग की सबसे बड़ी समस्या है। ग्राहकों को बाजार में गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं मिलती है। यहां सड़क पर ही वाहन पार्क हो रहे है।

47 साल पुराना बाजार, अनदेखी का शिकार
इंदिरा बाजार व्यापार मंडल अध्यक्ष कमल कुमार आसवानी का कहना है कि इंदिरा बाजार 1976 में बसाया गया, बाजार में रोजाना 100 करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है, लेकिन 47 साल पुराना यह बाजार सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहा है। बाजार में चोरी की घटनाएं होने से व्यापारियों ने मिलकर बाजार में 96 कैमरे लगाए, जिससे चोरियों व आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगा। बाजार में निगम के सहयोग से रोड लाइट्स लगवाई, लेकिन बाजार के बरामदों का जीर्णोद्धार नहीं हुआ है। दुकानें जर्जर अवस्था में पहुंच गई है। प्रशासन को बार—बार शिकायतें करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है। बाजार में पार्किंग भी एक बड़ी समस्या हैं। इंदिरा बाजार और नेहरू बाजार को आपस में कनेक्ट करने के लिए बीच में बेरिकेड्स लगाने से आवागमन बाधित होता है।

एमआई रोड पर वन—वे का बाजार में दबाव
इंदिरा बाजार व्यापार मंडल महामंत्री जितेन्द्र चैनानी का कहना है कि बाजार में सबसे अधिक दुकानें है, लेकिन यहां पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। एमआई रोड पर वन—वे होने से बाजार में ट्रैफिक दबाव बढ़ जाता है, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। पार्किंग नहीं होने से लोग सडक़ पर ही वाहन पार्क कर देते है, जिसके कारण यातायात बाधित होता है। मिस्त्री मार्केट अतिक्रमण की भेंट चढ़ा हुआ है। नेहरू बाजार और इंदिरा बाजार के बीच लगे बेरिकेड्स हटाए जाए।

पार्किंग की बड़ी समस्या
इंदिरा बाजार व्यापार मंडल के कार्यालय सचिव राधाकृष्ण सावलानी का कहना है कि पार्किंग की बड़ी समस्या है। दुकानदारों के साथ ग्राहकों को पार्किंग की जगह नहीं मिलती है। बरामदों का जिर्णोद्धार कभी नहीं हुआ, वे जर्जर स्थिति में है, उनकों ठीक करवाया जाए। बाजार में पार्क बदहाल हो रहे है, अगर उन्हें विकसित कर दिया जाए तो बाजार सुंदर हो सकता है।


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