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जयपुर के डॉक्टर्स ने पेसमेकर की तार से जोड़ा दिल का तार, बिना सर्जरी एक साथ बदले दो वाल्व

जयपुर के डॉक्टर्स ने हॉट-सीआरटी तकनीक से पेसमेकर के तार को दिल के तार से जोड़ कर हार्ट फैलियर मरीज की जान बचाई

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जयपुर

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Deepshikha

Dec 27, 2019

heart cahnge

जयपुर. मेडिकल साइंस की तरक्की भारत में पहली बार दो मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। देश में पहली बार जयपुर के डॉक्टर्स ने हॉट-सीआरटी तकनीक से पेसमेकर के तार को दिल के तार से जोड़ कर एक हार्ट फैलियर मरीज की जान बचाई है। वहीं ऐसे ही एक अन्य केस में बिना चीरफाड़ के कैथेटर के जरिए दो वाल्व एक साथ बदलने में सफलता प्राप्त की।

इटरनल हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. समीन के. शर्मा ने बताया कि दिल को विद्युत प्रवाह देने के लिए पेसमेकर के तीन तारों से भी लाभ नहीं मिलने पर चौथे तार को सीधे हार्ट के तार से जोडऩा अपने आप में अलग तकनीक है। इससे दिल के सभी हिस्सों को बराबर करंट पहुंचने से दिल की धड़कन सामान्य करने में मदद मिलती है। हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल व इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. जितेन्द्र सिंह मक्कड़ ने यह केस सफलता पूर्वक करके हार्ट फेलियर मरीज की जान बचाई है। इसी तरह हॉस्पीटल के ही टावर एंड स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज के डायरेक्टर डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने भी बिना ओपन सर्जरी के देश में पहली बार किसी मरीज के हार्ट के दो वाल्व एक साथ बदल कर कामयाबी हासिल की है। इसमें ट्रांसकैथेटर वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीक से हृदय के एओर्टिक व माइट्रल वाल्व बदले गए हैं।

तीन तारों से नहीं बना काम तो दिल से जोड़ा चौथा तार

डॉ. जितेन्द्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि भरतपुर की 67 वर्षीय शकुन्तला देवी को लंबे समय से हार्ट प्रॉब्लम चल रही थी और बढ़ते-बढ़ते हार्ट फेलियर की स्थिति इतनी हो गई कि हृदय की कार्यक्षमता 15 से 20 प्रतिशत ही रह गई। पेसमेकर के तीन तारों से भी काम नहीं बना तो ऐसे में उनकी जान बचाने के लिए हॉट-सीआरटी तकनीक अपना कर चौथे तार को हृदय से विद्युत प्रवाह करने वाली मुख्य तार जिसे हिज बंडल कहते हैं, से जोड़ा गया।

डॉक्टर का दावा है ऐसा भारत में पहली बार हुआ है। इलेक्ट्रोफीजियोलॉजी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कुश कुमार भगत ने बताया कि मरीज को पेसमेकर की तीसरी तार जिस नस में लगानी थी, वह काफी कमजोर थी और वहां तार लगाने से पेसमेकर का लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए हॉट-सीआरटी (हिज बंडल) तकनीक से चौथा तार दिल से जोड़ा गया। अब मरीज स्वस्थ है।

चीरफाड़ नहीं और बदल दिए दो वाल्व

ट्रांसकैथेटर वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीक (टावर) से बिना किसी चीरफाड़ के एक साथ दो हार्ट वाल्व बदलने का मामला भी देश में अनूठा है। डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने बताया कि दिल के मरीज नागपुर की 78 वर्षीय सरिता को सांस लेने व सीने में दर्द की शिकायत थी। उनके दो वाल्व काम नहीं कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनकी ओपन हार्ट सर्जरी में वाल्व बदला गया था, लेकिन अब दो वाल्व खराब हो चुके थे। मरीज की अधिक उम्र व पहले किए गए ऑपरेशन से दोबारा ओपन सर्जरी करना खतरनाक साबित हो सकता था। इसी लिए ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीक का इस्तेमाल कर उनका इलाज किया गया। मरीज अब एक बार में बिना किसी परेशानी के 30 से 45 मिनट पैदल चल सकती है।