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जांच में भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए, जयपुर नगर निगम हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर निलंबित

राजस्थान सरकार ने शुक्रवार रात को एक आदेश जारी कर जयपुर नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुजर्रर को मेयर और पार्षद पदों से निलंबित कर दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जयपुर ने 4 अगस्त को पट्टा जारी करने की एवज में मेयर हाउस में मुनेश के पति सुशील गुर्जर और उसके दो दलालों को 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।

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Munesh Gurjar Suspended

Munesh Gurjar Suspended

Jaipur Nagar Nigam Heritage Mayor Munesh Gurjar Suspended : राजस्थान सरकार ने शुक्रवार रात को एक आदेश जारी कर जयपुर नगर निगम हेरिटेज की मेयर मुनेश गुजर्रर को मेयर और पार्षद पदों से निलंबित कर दिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जयपुर ने 4 अगस्त को पट्टा जारी करने की एवज में मेयर हाउस में मुनेश के पति सुशील गुर्जर और उसके दो दलालों को 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। साथ ही जयपुर हेरिटेज मेयर के आवास से 40 लाख रुपए से अधिक की संदिग्ध नगदी बरामद की थी। राज्य सरकार ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अगले दिन ही 5 अगस्त को स्थानीय निकाय विभाग जयपुर के उपनिदेशक (क्षेत्रीय) को जांच करने के आदेश दिए थे।

निदेश जांच कर 16 अगस्त को राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट में प्रकरण में दोषी पाए जाने पर सरकार ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (1) के तहत सुनवाई का अवसर देते हुए मेयर मुनेश गुर्जर को 17 अगस्त को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। नोटिस मिलने के बाद मुनेश गुर्जर ने सरकार को अपना स्पष्टीकरण दिया था।

हालांकि, सरकार ने स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाए जााने पर राज. नगर पालिका अधि. की धारा 39 (3) के तहत राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के लिए विधि विभाग को लिख था। न्यायिक जांच अभी विचाराधीन है। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि मेयर पद पर बने रहते हुए मुनेश गुर्जर जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सक ती हैं, इसलिए राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (6) के तहत मिली शक्तियों के अंतर्गत मुनेश गुर्जर को मेयर और पार्षद पदों से निलंबित किया जाता है।

गौरतलब है कि इससे पहले मेयर मुनेश गुर्जर ने उनपल लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उनके आवास से मिली राशि को पारिवारिक बताया था। उन्होंने कहा था कि पारिवारिक जमीन बेचने पर उन्हें यह राशि मिली थी। हालांकि, एसीबी ने जांच में उनकी इस दलील को सही नहीं माना था।


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