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सावधान! नहीं चेते तो सड़कों पर रेंगता नजर आएगा ट्रैफिक

राजधानी की सड़कों पर तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या ने रफ्तार पर ऐसे ब्रेक लगाए हैं कि कई मुख्य मार्गों पर तो व्यस्ततम समय में वाहनों की रफ्तार साइकिल से भी कम रह गई है।

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सावधान! नहीं चेते तो सड़कों पर रेंगता नजर आएगा ट्रैफिक

सावधान! नहीं चेते तो सड़कों पर रेंगता नजर आएगा ट्रैफिक

संजय कौशिक/ जयपुर। राजधानी की सड़कों पर तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या ने रफ्तार पर ऐसे ब्रेक लगाए हैं कि कई मुख्य मार्गों पर तो व्यस्ततम समय में वाहनों की रफ्तार साइकिल से भी कम रह गई है। चौंकिए नहीं...व्यस्ततम समय में कुछ मुख्य सड़कों पर 4.5 किमी प्रति घंटा स्पीड है। आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का दावा है कि यदि ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट पर काम नहीं हुआ तो शहर की सड़कों पर वाहनों की औसत स्पीड 14 किमी प्रति घंटा ही रह जाएगी। जबकि, इसमें व्यस्ततम समय की रफ्तार का आकलन शामिल नहीं है। अभी औसतन स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा है। 3 फीसदी सालाना दर: गंभीर यह है कि वाहनों की संख्या 13 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है, इससे सार्वजनिक परिवहन का ग्राफ भी 14 से घटकर 10 प्रतिशत रह जाने की आशंका है।

सरकार के पास ये समाधान
सार्वजनिक परिवहन के साधनों की संख्या आबादी अनुपात में करें। इनके रूट निर्धारित हों, एक भी मुख्य रास्ता नहीं बचे जहां सार्वजनिक परिवहन नहीं पहुंच पाए। जेसीटीएसएल, मेट्रो, ई-रिक्शा, मिनी बस सभी में समन्वय हो।

सरकारी स्टडी रिपोर्ट में चिह्नित रूट पर यात्रियों की संख्या और उसी आधार पर परिवहन सुविधा का आकलन कर काम शुरू करें।

शहर के हर इलाके से लो-फ्लोर बस की कनेक्टिविटी होगी तो निजी वाहनों की संख्या घटेगी।

ओवरब्रिज-अंडरपास
मौजूदा ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सरकार जयपुर सहित कोटा, जोधपुर व अन्य शहरों में सुगम यातायात के लिए ओवरब्रिज, अंडरपास, एलिवेटेड रोड का जाल बिछा रही है। इस पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञ भी एकमत
यातायात के दबाव से निजात के लिए केवल सड़कों की चौड़ाई बढ़ाना, फ्लाइओवर-आरओबी निर्माण स्थायी विकल्प नहीं हैं, बल्कि सड़क से मोटराइज्ड वाहनों की संख्या घटाने पर फोकस करना होगा।

सार्वजनिक परिवहन
यातायात दबाव को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन का विकल्प सुझाया गया, लेकिन इसके लिए सरकार की इच्छाशक्ति महत्वपूर्ण है। पहली बार सरकारी नुमाइंदों ने स्पष्ट तौर पर राय दी है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन सेवा और नॉन-मोटराइज्ड वाहनों के संचालन के वैकल्पिक इंतजाम को अपनाने की जरूरत जताई है।

एकीकृत सार्वजनिक परिवहन की जरूरत
सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या से अलर्ट होने की जरूरत है। एकीकृत सार्वजनिक परिवहन की अत्यंत आवश्यकता है। इसमें मेट्रो, बस, बीआरटीएस को इंटरकनेक्ट करना चाहिए। पुणे-अहमदाबाद की तर्ज पर यहां भी सार्वजनिक परिवहन पर फोकस करें तो बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।
एन.सी. माथुर, सार्वजनिक परिवहन विशेषज्ञ व सेवानिवृत्त निदेशक (प्रोजेक्ट), जेडीए


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