
करौली के इस लाल ने परिवार की परम्परा को बढ़ाया आगे, बना सेना में अधिकारी
जयपुर. परिवार की परम्परा को आगे बढ़ाकर (Lieutenant Karan Singh Bainsla Karauli) बिग्रेडियर के इकलौते पुत्र करणसिंह बैंसला ने सेना में अधिकारी के रूप में कमान संभाली है। बैंसला को गत दिनों ही गोरखा रेजिमेंट में बतौर लेफ्टिनेंट भारतीय सेना में कमीशन दिया है। बैंसला के परिवार की चार पीढियों का सेना से जुड़ाव रहा है। करौली जिले के मूंडिया गांव निवासी हुकम सिंह बैंसला सेना में बिग्रेडियर के पद पर तैनात है, अब उनके इकलौते बेटे करण सिंह बैंसला ने भी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला है। करणसिंह बैंसला पूना से कम्प्यूटर साइंस में स्नातक है। उसने किसी अन्य सरकारी सेवा में जाने की बजाय सेना में जाना पसंद किया है। करण सिहं की एक बहन है जो 12वीं कक्षा में पढ़ती है। करणसिंह ने बताया कि अब देश की सीमाओं की सुरक्षा करना उसका कर्तव्य है। इसमें जान की बाजी लगा देगा।
चार सदस्य लड़ चुके भारत-पाकिस्तान का युद्
करौली जिले के मूंडिया गांव के निवासी नवनियुक्त लेफ्टिनेंट करणसिंह बैंसला की चार पीढ़ी सेना में रही है। करण के पिता सेना में बिग्रेडियर है व उनके ताऊ गुर्जर आरक्षण संघर्ष समित के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला सेना में कर्नल रहे हैं। इस परिवार का 95 साल से सेना से जुड़ाव है। 1926 में परिवार के दादा बच्चू सिंह, ब्रिटिश भारतीय सेना में 4/8 पंजाब रेजिमेंट में सिपाही के रूप में शामिल हुए। बाद में उनके 3 बेटों ने सेना में कमान संभाली। सबसे बड़े बेटे मोहर सिंह ने 1943 से 1973 तक सेना में सेवा की। वे सैन्य इतिहास में नौशेरा के युद् के रूप में प्रसिद् ऑपरेशन का हिस्सा रहे। दूसरे बेटे गंगा सहाय ने 1951 से 1973 तक सेना में सेवा की। बांग्लादेश के ढाका में बने इतिहास के साक्षी थे। तीसरे बेटा किरोड़ी सिंह बैंसला, 1961 में एक सिपाही के रूप में सेना में भर्ती हुए और 1964 में 5 गार्ड में एक अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। 1965 के भारत-पाक युद् की लड़ाई में तीनों भाई भी शामिल हुए। किरोड़ी सिंह बैंसला ने 1971 की लड़ाई भी लड़ी। वह 1991 में एक लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में सेवानिवृत्त हुए और अब जनता के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। इसी परिवार के कर्नल दौलत सिंह ने सेना में सेवा दी है। अभी लेफ्टिनेंट करणसिंह बैंसला के पिता हुकम सिंह ब्रिगेडियर हैं, वर्तमान में कमांडेंट गोरखा रेजिमेंटल सेंटर, वाराणसी में है।
Published on:
16 Jun 2020 02:46 pm
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