-अपनी मांगों को लेकर दसवें दिन भी वीरांगनाओं का धरना जारी, बुधवार को भाजपा का प्रतिनिधिमंडल इस मामले को लेकर मिला था राज्यपाल से
जयपुर। अपनी मांगों को लेकर पिछले 10 दिनों से धरना दे रहीं पुलवामा हमले के शहीदों की वीरांगनाओं का धरना पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के आवास के बाहर अभी भी जारी है। भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा के साथ वीरांगना धरने पर बैठी हुई हैं तो वहीं अब इस मामले में राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। राज्यपाल ने अपने पत्र में लिखा है कि ग्रामीणों की मांगों पर सरकार को विचार करना चाहिए।
वहीं बुधवार को भाजपा के प्रतिनिधि मंडल ने भी राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात करके विरांगनाओं की मांगों को अति शीघ्र पूरा किए जाने के संबंध में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इधर राज्यपाल कलराज मिश्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लिखे पत्र में कहा है कि भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा के साथ मंजू जाट, मधुबाला और सुंदरी और रेणू सिंह विरांगना हैं जो कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की धर्म पत्नी हैं।
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों के परिवार की देखभाल और उनका यथोचित सम्मान राज्य का दायित्व है। अतः इन वीरांगनाओं के अनुरोध पर विचार करते हुए कल्याणकारी राज्य की विचारधारा के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इससे पहले बुधवार को विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल कलराज मिश्र से मिला था और उन्हें ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठी वीरांगनाओं की मांगों को शीघ्र पूरा करने की गुहार लगाई थी। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी और भाजपा प्रवक्ता विधायक रामलाल शर्मा भी मौजूद थे।
सरकार ने किया साफ, मांग न्याय संगत नहीं
इधर वीरांगनाओं की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साफ कर दिया है कि वीरांगनाओं की मांग न्याय संगत नहीं हैं। नियमानुसार जो भी राहत पैकेज शहीदों के परिवार वालों को दिया जाना है वह सभी दे दिया गया है लेकिन शहीद के बेटे और बेटी को छोड़कर किसी अन्य को सरकारी नौकरी दिया जाना न्याय संगत नहीं है। अगर इस तरह की परंपरा चल पड़ी तो फिर अन्य लोग भी इस तरह की मांग उठाने लग जाएंगे और इससे शहीद के बेटे और बेटी के साथ नाइंसाफी होगी। बालिग होने पर शहीद के बेटे-बेटियों को नौकरी दे दी जाएगी।
मंत्री खाचरियावास और शकुंतला रावत भी मिले थे वीरांगनाओं से
वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की आवास के बाहर धरने पर बैठीं वीरांगनाओं से मुलाकात के लिए मंगलवार को कैबिनेट मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास और शकुंतला रावत भी पहुंचे थे और उनकी मांग को जायज ठहराया था और साथ ही सरकार के सामने उनकी मांगों को रखने की बात भी की थी लेकिन विरागंना लिखित में आश्वासन देने की मांग पड़ी हुई थी।
गौरतलब है कि पुलवामा हमले में शहीद हुए शहीदों की वीरांगना अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से धरने पर बैठी हुई थीं। पहले जहां वीरांगना राज्यसभा सांसद किरोड़ी मीणा के साथ विधानसभा के गेट पर धरने पर बैठ गए थे जहां पर पुलिस ने उन्हें उठा दिया था। उसके बाद शहीद स्मारक पर धरने पर बैठ गए थीं और अचानक 6 मार्च को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के आवास पर पहुंच गई थी जहां पर सचिन पायलट के सुरक्षाकर्मियों और उनके साथ आए लोगों के बीच में हल्की धक्का-मुक्की भी हुई थी।
बाद में सचिन पायलट ने उनकी बात सुनी थी और विरांगनाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी। साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर इस मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने की मांग भी की थी।
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