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UGC के नए नियमों के खिलाफ राजस्थान में विरोध तेज, ब्रिटिश काल के ‘रॉलेट एक्ट’ से तुलना, कई जिलों में निकली रैलियां

यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ अब राजस्थान में भी विरोध तेज हो गया है। कई जिलों में कलक्टर को ज्ञापन दिए गए हैं। वहीं सड़कों पर रैलियां निकाली जा रही हैं। श्री राजपूत करणी सेना ने यूजीसी एक्ट की तुलना ब्रिटिश काल के 'रॉलेट एक्ट' से की है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Jan 27, 2026

UGC protest in Rajasthan

कई जिलों में हुए प्रदर्शन की तस्वीरें (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा लागू किए गए नए इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर राजस्थान में विरोध तेज होता जा रहा है। राजधानी जयपुर सहित अलवर, झुंझुनूं और अजमेर सहित कई जिलों में सामाजिक संगठनों और सामान्य वर्ग के छात्रों ने प्रदर्शन कर इन नियमों को वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये प्रावधान समानता के नाम पर एक वर्ग के खिलाफ अन्याय को बढ़ावा देते हैं।

दरअसल, UGC ने 13 जनवरी को Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026 को अधिसूचित किया था। आयोग का दावा है कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, लिंग, धर्म, दिव्यांगता और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिकायत निवारण के लिए नई व्यवस्थाएं अनिवार्य की गई हैं।

झूठी शिकायतों पर स्पष्ट प्रावधान नहीं

हालांकि, नियम लागू होते ही इसे लेकर असंतोष भी सामने आने लगा। जयपुर में ब्राह्मण महासभा, श्री राजपूत करणी सेना, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। संगठनों का कहना है कि इक्विटी कमेटियों में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य नहीं किया गया है और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में किसी भी छात्र का भविष्य बिना ठोस जांच के खतरे में पड़ सकता है।

श्री राजपूत करणी सेना का आरोप

श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने इन नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के रॉलेट एक्ट से करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था बिना सुनवाई, बिना अपील और बिना बचाव का अवसर दिए आरोप तय करने जैसी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों में संशोधन नहीं किया गया, तो पहले राजस्थान विधानसभा का घेराव होगा, उसके बाद लोकसभा स्तर तक आंदोलन और जरूरत पड़ने पर देशव्यापी विरोध किया जाएगा।

अजमेर कलक्टर को ज्ञापन

यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले में संतों के अपमान को लेकर सामान्य एवं ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों ने जिला कलक्टर को राष्ट्रपति के नाम संयुक्त ज्ञापन सौंपा। गुंजन शर्मा और आनंद पुरोहित ने बताया कि यूजीसी के नए नियम समाज में समानता की भावना को कमजोर करते हैं। देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी-रैगिंग नियम एवं एससी/एसटी एक्ट जैसे कानून प्रभावी हैं। जातिगत आधार पर नए नियम बनाना पक्षपातपूर्ण है। सामान्य वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है, जो न्यायसंगत नहीं है।

राष्ट्रपति को पत्र

वहीं सर्व ब्राह्मण महासभा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्तावित नए नियमों को लेकर राष्ट्रपति को पत्र भेजा। जिला अध्यक्ष अंकुर त्यागी ने बताया कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 धर्म, जाति और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ रहा है। उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अलग से नए जातिगत नियम लाना गलत है।

हिंदू महासभा ने कहा- 'काला कानून'

वहीं, राष्ट्रीय हिंदू महासभा ने भी इन नियमों को लेकर सवाल खड़े किए। संगठन के अध्यक्ष विजय कौशिक ने इसे “काला कानून” बताते हुए कहा कि ऐसे प्रावधान समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर असर डालेंगे।

एनएसयूआई ने नए नियमों का किया स्वागत

दूसरी ओर, इस मुद्दे पर समर्थन की आवाजें भी सामने आई हैं। छात्र संगठन एनएसयूआई ने नए नियमों का स्वागत करते हुए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों के तहत 24×7 हेल्पलाइन, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर और निगरानी तंत्र से कैंपस में होने वाले वास्तविक भेदभाव पर प्रभावी रोक लगेगी। एनएसयूआई का दावा है कि नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान छात्रों के हित में है।

कुल मिलाकर, UGC के नए इक्विटी रेगुलेशन को लेकर राजस्थान में विरोध और समर्थन के दोनों ही स्वर तेज हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे के और गर्माने के आसार नजर आ रहे हैं।