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गुलाबी नगर हो रहा ‘लाल’: 40 डिग्री सेल्सियस के दिन 47 के पार

राजधानी जयपुर भीषण गर्मी की चपेट में है। शहर के 150 में से 67 वार्ड 'संवेदनशील' और 'अति संवेदनशील' श्रेणी में आ गए हैं। पारा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। जयपुर नगर निगम ने जो हीट एक्शन प्लान बनवाया है, उसकी पड़ताल की गई।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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अश्विनी भदौरिया

Mar 15, 2026

जयपुर. गुलाबी नगर में गर्मी का मिजाज हर साल और सख्त होता जा रहा है। हाल ही तैयार 'जयपुर हीट एक्शन प्लान' के विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले तीन दशकों में शहर में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब जयपुर में हर साल औसतन 47 दिन ऐसे होते हैं, जब पारा 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है। दो दशक पहले तक ऐसे दिनों की औसत संख्या 42 थी। जलवायु परिवर्तन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और हरित क्षेत्र में लगातार आती कमी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। शहर के कुल 150 वार्डों में से 67 वार्ड अति संवेदनशील और संवेदनशील जोन में चिह्नित किए गए हैं।

तापमान के साथ स्वास्थ्य पर भी प्रहार
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव जनता के स्वास्थ्य, जल संसाधनों और शहर की जीवनशैली पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट में घनी आबादी वाले 16 वार्डों को 'अति संवेदनशील' और 51 वार्डों को 'संवेदनशील' माना गया है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं और गर्मी के दौरान पानी व छाया की कमी संकट को और बढ़ा देती है।

क्यों चढ़ रहा है पारा?
— कंक्रीट के जंगल: तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों और कंक्रीट के ढांचे गर्मी को सोख लेते हैं।
— हरियाली में कमी: हरित क्षेत्र के घटने से प्राकृतिक शीतलता कम हो गई है।
— भूजल गिरावट: गिरता भूजल स्तर जमीन की नमी को खत्म कर रहा है।
— जलवायु परिवर्तन: वैश्विक स्तर पर बदलता मौसम स्थानीय तपिश को बढ़ा रहा है।

हीट एक्शन प्लान: बचाव के लिए प्रशासन के सुझाव
— कूलिंग स्टेशन और शेयर्ड स्पेस: बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और लेबर चौक जैसे सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। एक स्टेशन विकसित करने पर 50 हजार से 2 लाख और बड़े शेयर्ड स्पेस पर 25 से 30 लाख रुपए तक खर्च होंगे।
— ग्रीन नेट: ट्रैफिक सिग्नल और पर्यटन स्थलों के पास ग्रीन नेट लगाए जाएंगे ताकि पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को सीधी धूप से राहत मिल सके।
— पौधारोपण: आगामी मानसून में नीम, खेजड़ी जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
— स्वास्थ्य सेवाएं: मार्च से जून के बीच संवेदनशील वार्डों में मोबाइल मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे ताकि हीट स्ट्रोक के मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
— वाटर हार्वेस्टिंग: भूजल स्तर सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

जोन वाइज वार्डों की स्थिति
जोन ------- आति संवेदनशील ----- संवेदनशील वार्ड
विद्याधर नगर ---- 4------- 1, 2, 3, 5, 6, 12, 13, 15, 17, 19
झोटवाड़ा ----- 25, 26, 27, 37 --- 23, 24, 28, 33, 35, 36
सांगानेर -------- 38, 39, 58 -------- 40, 41, 47, 50, 51, 54, 54
बगरू -------- 59, 61, 68 -------- 60, 63, 66, 67, 69
मालवीय नगर -------- कोई नहीं -------- कोई नहीं
सिविल लाइंस -------- कोई नहीं -------- 91, 93, 103
किशनपोल -------- 106,113 -------- 105, 108, 109, 110, 111, 112, 114, 115
आदर्श नगर -------- 117 -------- 116, 119, 126, 127
हवामहल -------- 147 -------- 137, 140, 142, 143, 144, 146
आमेर -------- 149 -------- 148, 150