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‘मानसून‘ को लेकर बड़ी खबर, किसानों को इस बार रूला सकता है ‘मानसून‘, सामान्य से कम होगी बारिश!

Monsoon 2019: मौसम विभाग के विपरीत निजी एजेंसी स्काईमेट का दावा इस बार अल नीनो का पड़ सकता है असर...

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जयपुर

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Dinesh Saini

May 15, 2019

rain

जयपुर।

भारतीय मौसम विभाग से उलट निजी क्षेत्र की कंपनी स्काईमेट वेदर सर्विसेज ( Skymet Weather Services ) का कहना है कि इस साल मानसून ( Monsoon 2019 ) सामान्य से कम रहेगा। स्काईमेट के पूर्वानुमानों के मुताबिक, इस साल मानसून पर अलनीनो का असर पड़ सकता है। निजी एजेंसी के मुताबिक इस साल मानसून सामान्य का 93 फीसदी रह सकता है। इस बार मानसून चार दिन देर से 4 जून को केरल पहुंच सकता है।

इससे पहले 22 मई को मानसून अंडमान निकोबार पहुंचेगा। इससे पहले भारत के मौसम विभाग (आइएमडी) ने कहा था कि अल नीनो की स्थिति कमजोर बनी हुई है। इसके आगे बढऩे की संभावना बहुत कम नजर आ रही है। अगले कुछ महीनों में ये और कमजोर हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो देश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है नहीं तो इस बार किसानों को मानसून रूला भी सकता है। आंधी और तूफान का ये मौसम मानसून को राजस्थान में घुसने में बाधा उत्पन्न करेगा। आशंका है कि इस कारण प्रदेश में मानूसन एक सप्ताह देरी से प्रवेश करेगा।

स्काईमेट के मुताबिक, इस साल बंगाल, बिहार, झारखंड में बारिश कम होगी। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में अच्छी बारिश के अनुमान जताए जा रहे हैं। पूर्वी भारत में 92 फीसदी और मध्यभारत में मानसून सामान्य से 50 फीसदी कम रह सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानूसन के सामान्य रहने का पूर्वानुमान ( Meteorological Department )
वहीं मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल मानूसन के सामान्य रहने का पूर्वानुमान है। आधा मई बीतने के बावजूद पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान तक आ रहा है। बार-बार उत्तरी पाकिस्तान पर चक्रवाती परिसंचारी तंत्र बन रहा है और विक्षोभ के असर से नमी व धूल राजस्थान की तरफ खींची चली आ रही है। ईरान व पाकिस्तान से बार-बार धूल भरे गुब्बार उठ रहे हैं जो राजस्थान के साथ उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों को भी प्रभावित कर रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार विक्षोभ का प्रभाव अगले एक महीने तक बना रहेगा। आंधी व छींटों का मौसम जून के मध्य तक रहेगा। इसकी वजह से मानसून में एक सप्ताह की देरी संभव है।

पिछला साल मानसून के लिहाज से था खराब
2018 मानसून के लिहाज से सबसे खराब साल रहा। 12 क्षेत्रों में बहुत कम बारिश हुई और वहां सूखे का असर देखने को मिला।