
Mukesh Khanna
जयपुर। करीब 25 साल पहले टीवी पर जब सफेद दाढ़ी वाले पितामह हाथ उठाकर 'आयुष्मान भव' कहते थे तो आशीर्वाद पाने वालों के चेहरों पर एक सुकून नजर आता था। वही भीष्म पितामह, शक्तिमान बनकर गोल-गोल घूमकर जब गायब हो जाते तो टीवी के सामने बैठे बच्चे खूब तालियां बजाते थे। टेलीविजन के दो अलग किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना आज भी लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। निजी यात्रा पर जयपुर पहुंचे मुकेश खन्ना ने जिंदगी के ऐसे कई अनुभव शेयर किए। मोदी नगर पुरानी चुंगी के एक निजी होटल में ठहरे मुकेश खन्ना ने बताया कि पहले बच्चे मुझे देखकर डर जाते हैं। मेरी पर्सनेलिटी ऐसी है कि बच्चे मुझे देखकर डर जाते हैं। उनके आगे मैं बहुत लम्बा-चौड़ा लगता हूं, लेकिन यह अजीब इत्तेफाक है कि डरने के बावजूद कुछ देर बाद ही मेरी बच्चों से दोस्ती हो जाती है। ऐसा बाहर नहीं, बल्कि मेरे परिवार में भी होता था। मेरी अपने भाई के बच्चों से बहुत अच्छी बॉन्डिग थी। वह मुझे अपना बेस्ट टीचर मानते थे। शक्तिमान के बाद तो ऐसा हो गया कि सड़क पर मिलने वाला हर बच्चा मेरा दोस्त बन जाता था।
जयपुर की मेहमान नवाजी बेमिसाल
अपने दो दिवसीय आवास पर जयपुर आए खन्ना ने जयपुर की मेहमान नवाजी की तारिफ की। खन्ना ने जयपुर की कला-संस्कृति की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि यहां के लोग खास है। उसमें सबसे ज्यादा आपस में प्यार है। खन्ना ने बताया कि महाभारत से पहले उन्होंने करीब 15 फिल्में की थीं, लेकिन कोई चली नहीं और कई रिलीज भी नहीं हुई। वह महाभारत में अर्जुन या कर्ण का किरदार निभाना चाहता थे। मुझे दुर्योधन का किरदार ऑफर हुआ था, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। मैंने कहा कि मैं निगेटिव रोल कर ही नहीं सकता। तब मुझे द्रोणाचार्य का किरदार मिलाए जो मैंने स्वीकार भी कर लिया लेकिन मेरी किस्मत में आयुष्मान भव कहना लिखा था।
पिता के रोल मिलने लगे
खन्ना ने बताया कि उन्हें शाहरुख खान , अक्षय कुमार से लेकर बॉबी देओल तक के पिता के रोल मिलने लगे। हद तो तब हो गई जब फिल्म यलगार में मैंने फिरोज खान साहब के पिता का रोल निभाया। ऐसा नहीं है कि मुझे काम नहीं मिलता, लेकिन मैं खुद इतना चूजी हो गया हूं कि पर्दे पर नजर नहीं आता। कोई अच्छा पॉजटिव रोल मिलेगा तभी काम करना चाहूंगा।
मैं खुद को लकी मानता हूं
कोई गब्बर के रूप में फेमस है तो कोई मोगैम्बो के रूप में, लेकिन मैं आज भी भीष्म पितामह और शक्तिमान दोनों ही किरदारों से पहचाना जाता हूं। बच्चे मुझे मिलते हैं तो कहते हैं घूमकर गायब होकर दिखाइए। वहीं कई बार मुझे मेरी उम्र से बड़े लोग आशीर्वाद देने के लिए कहते हैं।
Published on:
19 May 2018 09:42 pm
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