जेब हुई खाली तो इतिहास बन गए नशामुक्ति केंद्र

22 वर्ष चलने के बाद प्रदेश का पहला नशामुक्ति केंद्र भी बंद, केंद्र सरकार से मदद नहीं मिलने के कारण संचालन हुआ बंद, निजी केंद्रों पर महंगा पड़ रहा नशामुक्ति का उपचार करना

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Apr 24, 2016
NASHA MUKTI

भोपाल. प्रदेश में शराबबंदी होनी चाहिए, साथ ही शराब की आदत छुड़ाने के इंतजाम होने चाहिए। , लेकिन शहर में सरकारी मदद से चलने वाले पांच नशामुक्ति केंद्र लम्बे समय से बंद पड़े हैं। इस सेंटरों पर सिर्फ दो से ढाई हजार रुपया खर्चा आता था। जबकि, आज प्राइवेट सेंटर इससे पांच गुना ज्यादा रुपए वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं इन सेंटरों में से एक सेंटर बाल नशामुक्ति केंद्र भी था। इन सेंटरों के बंद होने से बाल कल्याण समिति को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांधी भवन मे प्रदेश का पहला नशामुक्ति केंद्र 'नवजीवनÓ चला करता था। भारत सरकार से अनुदान प्राप्त यह केंद्र 22 साल चलने के बाद पिछले तीन साल से बंद पड़ा है। शहर का पहला केंद्र होने के नाते इस पर नशा छुड़वाने के लिए आने वालों की काफी भीड़ रहती थी। बच्चे और बड़े इस सेंटर पर आते थे। बंद होते समय भी यहां का खर्चा मात्र 2 से ढाई हजार रुपए के बीच था, क्योंकि यहां सिर्फ खाने का रुपया लिया जाता था। इस केंद्र में बड़ी संख्या में लोग नशे से उबर चुके हैं, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। आज इस सेंटर में फोटो गैलरी बन गई है। दूसरा केंद्र 10 नम्बर स्टाप पर शांति निकेतन के नाम से संचालित होता था। तीसरा केंद्र हर्षवर्धन कॉलोनी, चौथा पुतली बाई बस स्टैंड के पास काउंसलिंग सेंटर और पांचवां बच्चों के लिए बाल नशामुक्ति केंद्र था, जो वहीं बस स्टैंड के पीछे चला करता था।

बच्चों के मामले में ज्यादा परेशानी
इन सेंटरों के बंद होने से बाल कल्याण समिति के सामने ज्यादा समस्या है। शहर में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंडों पर आज भी तमाम बच्चे नशा करते हुए घूमते हैं, लेकिन उनका नशा छुड़ााने के लिए कोई जगह नहीं है। इस वजह से उनमें सुधार नहीं हो पा रहा। वहीं पुलिस के सामने भी बड़ी समस्या है। अगर थाने में कोई नशेबाज आ जाए, तो उनके पास कोई चारा नहीं रहता कि उसे कहां भेजें। बाद में दुत्कार कर भगाना ही पड़ता है।

शहर में बच्चों के लिए एक भी नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं। इस वजह से काफी परेशानी होती है। बच्चों को कहां रखें, ये सबसे बड़ी समस्या है।
-रेखा श्रीधर, बाल कल्याण समिति

पहले भारत सरकार से अनुदान प्राप्त नशामुक्ति केंद्र चलते थे, जहां सिर्फ खाने का रुपया लेते थे। बाकी पैसा सरकार की तरफ से आता था। अब ये लम्बे समय से बंद पड़े हैं।
-सीपी शर्मा, नवजीन नशामुक्ति केंद्र से जुड़े पुराने सदस्य

पहले भारत सरकार की तरफ से ग्रांट मिला करती थी। अब काफी लम्बे समय से ग्रांट नहीं आ रही है। इस वजह से सेंटर बंद हैं। प्रयास कर रहे हैं कि शहर में जल्द एक सेंटर खोला जाए।
-वीके उइके, नशाबंदी प्रचारक, सामाजिक न्याय विभाग, भोपाल
Published on:
24 Apr 2016 02:53 am
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