
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Photo - IANS)
Chagos Islands dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और अंदरूनी राजनीति में उठे विवाद के बाद ब्रिटेन मॉरीशस को चागोस आइलैंड सौंपने पर यूटर्न लेने वाला है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की लेबर सरकार ने चागोस को मॉरीशस को सौंपे जाने वाला बिल हाउस ऑफ लॉर्ड्स के एजेंडे से हटा लिया है। बिल सोमवार को वोटिंग के लिए रखा जाना था
यह हिंद महासागर में मॉरीशस से करीब 1,250 मील उत्तर-पूर्व में है। 1814 में नेपोलियन की हार के बाद पेरिस संधि के तहत चागोस द्वीप मॉरीशस के साथ ब्रिटेन के नियंत्रण में आ गए। 1965 में ब्रिटेन ने इन्हें मॉरीशस से अलग कर दिया। 1968 में मॉरीशस को आजादी मिली। चागोस ब्रिटेन के पास रहा। द्वीपसमूह के सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया पर ब्रिटेन-अमेरिका ने सैन्य अड्डा बनाया।
1980 के दशक से मॉरीशस ने द्वीपसमूह पर दावा किया। 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कहा कि ब्रिटेन चागोस का प्रशासन खत्म करे। ब्रिटेन ने समझौता किया कि चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस को दिया जाएगा, लेकिन डिएगो गार्सिया द्वीप 99 साल की लीज पर ब्रिटेन के पास रहेगा। इसके बदले ब्रिटेन मॉरीशस को सालाना करीब 101 मिलियन पाउंड देगा।
पहले डील के पक्ष में रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब इसे महामूर्खता करार दिया है। इसके अलावा ब्रिटेन के विपक्षी दल कंजर्वेटिव पार्टी ने इसे 1966 की ब्रिटेन-अमरीका संधि का उल्लंघन कहा। शनिवार को कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद प्रीति पटेल ने कहा कि बिल वापस लेने का फैसला उन सभी लोगों की जीत है जो चागोस को सौंपने के खिलाफ खड़े थे। हालांकि, लेबर सरकार ने साफ किया है कि बिल को दोबारा पेश किया जाएगा।
भारत ने मॉरीशस से समझौता किया है, जिसके तहत वह चागोस में एक सैटेलाइट स्टेशन स्थापित कर सकेगा। यह स्टेशन डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे के पास बनाया जा सकता है। भारत, चागोस को मॉरीशस को सौंपने का समर्थन कर चुका है। वहीं, मॉरीशस ने ट्रंप के बयान पर कहा था कि हमारी संप्रभुता स्पष्ट है। इस पर बहस नहीं होनी चाहिए।
Published on:
25 Jan 2026 01:07 am
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