
जयपुर।
नगर निगम ग्रेटर के पार्कों के रखरखाव का मामला इन दिनों चर्चा में है। पहले यूडीएच मंत्री ने रखरखाव जेडीए को सौंप दिया। फिर कार्यवाहक महापौर शील धाभाई के आग्रह पर वापस निगम को ही काम मिल गया है। मगर इस इधर—उधर के चक्कर में निगम का बड़ा खेल भी सामने आया है। दरअसल नगर निगम जिन दरों पर पार्कों का रखरखाव कर रहा है, जेडीए उससे आधी दरों पर ही पार्क मैंटेन कर रहा है। इस पर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को बड़े भ्रष्टाचार की बू आई तो उन्होंने ग्रेटर निगम आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा है। अब निगम प्रशासन मंत्री के जवाब—तलब से हरकत में आ गया है।
जेडीए 20 और निगम 39 हजार रुपए हैक्टेयर में करता है रखरखाव
पार्कों के रखरखाव की दरों पर नजर डाली जाए तो जेडीए जहां 20 हजार रुपए हैक्टेयर में पार्कों का रखरखाव कर रहा है, वहीं निगम में यह दर लगभग दुगुनी यानि 39 हजार रुपए हैक्टेयर है। यही नहीं जेडीए जहां हर महीने रखरखाव के पैसे का भुगतान करता है, वहीं निगम सालाना के हिसाब से पैसा चुका रहा है। इसके अलावा जेडीए अपनी 2016 की स्वीकृत बीएसआर दर पर ठेका देता है, जबकि निगम 2019 की की बीएसआर दर पर ठेका देता है।
यूं सामने आया मामला
दरअसल ग्रेटर निगम के 850 पार्कों के रखरखाव का काम मंत्री के कहने पर जेडीए को दिया गया था। जब जेडीए ने दरों का पता लगाया तो ये ज्यादा मिली, जिस पर जेडीए ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल को नोट भेजा था। इसमें दरें ज्यादा होने की शिकायत की गई थी। जेडीए के नोट के आधार पर ही धारीवाल ने आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव से स्पष्टीकरण मांगा है।
Published on:
02 Jan 2022 08:27 am
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