
कोटपूतली-बहरोड़. खाद्य तेलों के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिले में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल तिलहन योजना की शुरुआत की गई है। जिला कलक्टर कल्पना अग्रवाल की अध्यक्षता में जिला क्रियान्वयन समिति और जिला तिलहन मिशन की बैठक आयोजित की गई जिसमें योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार महेंद्र कुमार जैन ने बताया कि यह योजना वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक संचालित होगी। योजना के तहत सरसों, मूंगफली व तिल जैसी तिलहनी फसलों को बढ़ावा देकर खाद्य तेल आयात में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले को वर्ष 2025-26 के लिए 5500 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य दिया गया है जिसका क्रियान्वयन क्लस्टर आधारित प्रणाली पर किया जाएगा।
एफपीओ और वीसीपी के माध्यम से सहायता
योजना के तहत किसानों को एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) और वैल्यू चेन पार्टनर (वीसीपी) के माध्यम से सहायता दी जाएगी। किसानों का चयन, मिट्टी परीक्षण, बीज वितरण, उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग तक की जिम्मेदारी वीसीपी द्वारा निभाई जाएगी। वीसीपी के प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जा चुके हैं।
योजना में मिलेगा वित्तीय सहयोग
पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास ेक लिए एफपीओ, सहकारी संस्थाओं एवं निजी कंपनियों को मशीन लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 9.90 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही किसानों को उन्नत बीज, शीघ्र पकने वाली किस्में, आधुनिक तकनीक एवं प्रदर्शन प्लॉट्स के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।
नवाचार व डिजिटल तकनीक का होगा उपयोग
योजना के क्रियान्वयन में डिजिटल तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। आगामी पांच वर्षों के लिए बीज उत्पादन की रूपरेखा तैयार की जा रही है और बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना की योजना भी बनाई गई है। आगामी 5 वर्षों का सीड रोलिंग प्लान तैयार कर बीज उत्पादक एजेंसी के साथ तीन वर्षों का अनुबंध किया जाएगा। बीज हब तथा विशेष भंडारण इकाइयों (सोयाबीन एवं मूंगफली) की स्थापना की जाएगी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का भी प्रयोग किया जाएगा।
15 मई तक कर सकेंगे आवेदन
संयुक्त निदेशक कृषि महेन्द्र जैन ने बताया कि तिलहन फसलों को बढ़ावा देने का कार्य एफपीओ व सहकारी संस्था के माध्यम से होगा। इसके लिए 15 मई तक एफपीओ/सहकारी संस्था आवेदन कर सकेंगे। योजना के क्रियान्वयन को लेकर कृषि विभाग ने कार्य शुरू कर दिया है। जिले में सरसों फसल को शामिल किया गया है। उन्होंने जिले के सरसों उत्पादक किसानों से योजना से अधिकाधिक संख्या में जुडऩे का आह्वान किया।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र सैनी, सिंचाई व सहकारिता विभाग के अधिकारी सहित संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Updated on:
06 May 2025 11:33 am
Published on:
06 May 2025 11:04 am
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