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नवलगढ़ का गढ़ जीतना कडी चुनौती है इनके लिए, नई दावेदारी ने बदले समीकरण

शेखावाटी में आने वाले नवलगढ विधानसभा चुनाव का इतिहास बेहद रोचक है। यहां राजनीतिक दलों को हमेशा निर्दलीय प्रत्याशी कडी चुनौती देते आए हैं और यह इस बात

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जयपुर

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Rahul Singh

Apr 22, 2018

शेखावाटी में आने वाले नवलगढ विधानसभा चुनाव का इतिहास बेहद रोचक है। यहां राजनीतिक दलों को हमेशा निर्दलीय प्रत्याशी कडी चुनौती देते आए हैं और यह इस बात से भी साबित हो रहा है कि अब तक चार बार निर्दलीय प्रत्याशी प्रदेश की सबसे बडी पंचायत विधानसभा तक पहुंचे है। इस बार इस सीट से कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और सेवादल के पूर्व मुख्य संगठक रहे सुरेश चौधरी दावेदारी ठोक रहे है। वैसे वर्तमान विधायक राजकुमार शर्मा भी कांग्रेस से टिकट मांग रहे है लेकिन चौधरी के सामने आने के बाद उम्मीदवारी का फैसला बेहद रोचक हो गया है। सुरेश चौधरी ने इस सीट पर जनसंपर्क भी शुरु कर दिया है और वे एंटी इन्कमबैंसी का फायदा लेना चाह रहे है

जातिगत समीेकरण— नवलगढ विधानसभा में करीब ढाई लाख मतदाता है इसमें सबसे ज्यादा जाट मतदाता करीब 70 हजार के आसपास है। इसके अलावा अल्पसंख्यक 40 हजार, सैनी 35 से 40 हजार, 35 हजार के करीब अनुसूचित जाति के मतदाता है। बाकी में ब्राहम्ण, गुर्जर, कुम्हार आदि जातियां है।

ओला का वर्चस्व— कदृदावर जाट नेता शीशराम ओला का झुंझनुं जिले में एकतरफा वर्चस्व रहा है। वे वर्ष 1948 में गांव अरड़ावता के सरपंच चुने गये और 1951 तक वहां के सरपंच रहे। ओला 1957 और 1962 के राजस्थान विधान सभा चुनावों में खेतड़ी विधान सभा क्षेत्र से जीते। 1967 के चुनाव में ओला स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए, लेकिन 1969 को हुए उप-चुनाव में वो खेतड़ी से ही चुनाव जीत गए। इसके बाद वे 1972 और 1977 में पिलानी तथा 1980,, 1985 और 1993 के विधान सभा चुनावों में झुंझुनू विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये। ओला को फ़रवरी 1981 को राज्य सरकार मंत्रिमण्डल में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज तथा सैनिक कल्याण विभाग के राज्य मंत्री नियुक्त किए गए। उस समय शिवचरण माथुर मुख्यमंत्री थे। 11 मार्च 1985 में वो सहकारिता वन एवं पर्यावरण और सैनिक कल्याण आदि विभागों के राज्यमंत्री बने। अक्टूबर 1985 को उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वे कुल 8 बार विधायक और पांच बार सांसद चुने गए थे। वे यूपीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे।

भंवर सिंह और प्रतिभा सिंह को बनाया विधायक— शीशराम ओला इतने बडे नेता थे उन्होंने अपने दम पर भंवर सिंह और प्रतिभा सिंह को नवलगढ से विधानसभा में जिताकर पहुंचाया। कहते हैं कि बगैर ओला के आशीर्वाद के उस समय कोई चुनाव नहीं जीत सकता था।
नवलगढ विधानसभा का इतिहास— 1951 से 2013 तक 14 विधानसभा चुनाव में पांच बार कांग्रेस का प्रत्याशी विधानसभा में पहुंचा है, वहीं चार बार निर्दलीय प्रत्याशी ने बाजी मारी है। वहीं एक एक बार अखिल भारतीय राम राज्य परिषद, स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी,लोकदल और बसपा का प्रत्याशी विधायक बने है। पिछले दो चुनाव में राजकुमार शर्मा एक बार बसपा से विधायक बने थे, बाद में वे कांग्रेस में बसपा के पांच अन्य विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे, वहीं पिछले चुनाव में राजकुमार शर्मा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतरकर विधानसभा में पहुंचे।

भाजपा का नहीं खुला खाता— भाजपा के गठन के बाद एक बार भी यहां इनका उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है। भाजपा के गठन से से पहले जनता पार्टी से 1977 में एक बार नवरंग सिंह यहां से विधायक बने थे लेकिन उसके पहले और उसके बाद आज तक भाजपा विधानसभा से दूर है।

नवलगढ विधानसभा का इतिहास
1951 भीम सिंह अखिल भारतीय राम राज्य परिषद
1957 श्री राम निर्दलीय
1962 भीम सिंह कांग्रेस
1967 सांवरमल स्वतंत्र पार्टी
1972 भंवर सिंह कांग्रेस
1977 नवरंग सिंह जनता पार्टी
1980 भंवर सिंह कांग्रेस
1985 नवरंग सिंह लोकदल
1990 भंवर सिंह— निर्दलीय
1993 भंवर सिंह — कांग्रेस
1998 भंवर सिंह— कांग्रेस
2003 प्रतिभा सिंह— निर्दलीय
2008 राजकुमार शर्मा— बसपा, बाद में बसपा का कांग्रेस में विलय
2013 राजकुमार शर्मा— निर्दलीय