
जयपुर। बड़े शहरों में कॅरियर और सपनों की तलाश में आई महिलाएं और लड़कियां के लिए पीजी और हॉस्टल एक अहम विकल्प बनकर सामने आते हैं। लेकिन क्या इनमें रहने वाली महिलाएं सच में सुरक्षित है? क्या उन्हें वह सुरक्षा मिल रही जिसकी वे हकदार है? कारण कि शहर में संचालित हो रहे अधिकांश पीजी का न तो कोई पंजीकरण है और न ही वहां के स्टाफ का संबंधित इलाके के थाने में कोई पुलिस वैरिफिकेशन हो रहा है।
पीजी होस्टल एसोसिएशन के मुताबिक जयपुर में चलने वाले पीजी में से 50 फीसदी ऐसे हैं, जो घरों में चल रहे है। ये न तो कहीं पंजीकृत हैं और न ही इनमें सुरक्षा किसी मानक को अपनाया जा रहा है। ये न तो कही पंजीकृत होते हैं और न ही सुरक्षा से संबंधित कोई मानक है। और तो और कुछ में तो मकान मालिक और उनके पुरुष परिजन भी जब चाहे तब पीजी एरिया में आ धमकते हैं। चौकाने वाली बात यह है कि पुलिस भी इनकी तरफ से पूरी तरह से आंखें मूंदे हुए है। वहीं राजधानी में लगभग 970 हॉस्टल पीजी ऐसे हैं, जो पंजीकृत और जिनके पास दस्तावेज है। इनमें से 550 पुरुष और 420 महिला पीजी है।
दिल्ली से आने के बाद यहां टोंक रोड़ एक पीजी में 8 हजार रुपए किराया में रह रही थी। पीजी रेजीडेंट था। सिक्योरिटी और मेंटेनेंस चार्ज के तौर पर 10 हजार रुपए लेते हैं, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। प्राइवेसी नहीं होती मकान मालिक के बेटे और भाई कभी भी गर्ल्स के एरिया में आ जाते, जिससे लड़कियां असहज हो जाती हैं। यही नहीं कमरे की दूसरी चाबी अपने पास रखते थे।
-रूही मिश्रा (परिवर्तित नाम)
पीजी का रेंट 10 हजार रुपए प्रति माह है। लेकिन बेसिक सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। हमसे 15 हजार सिक्योरिटी डिपोजिट तो ले रहे, लेकिन बदले में सामान्य सुविधा, सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं भी प्रोवाइड नहीं करवा रहे। जो स्टाफ यहां काम कर रहा है उनका भी वैरिफिकेशन नहीं है। पीजी को महिला पुलिस थाने से जोड़ा जाना चाहिए।
-मृणाली
सत्यापन कराना अनिवार्य नजर ऐप के जरिए अधिक से अधिक तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। स्टाफ का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, अगर कोई नहीं करवाता तो इसकी सूचना मिलते ही हम उस पर कार्रवाई करते हैं।
-कुंवर राष्ट्रदीप, एडिशनल कमिश्नर
पीजी में सुरक्षा के इंतजाम मापदंडों की पालना कुछ जगहों पर नहीं हो रही। हालांकि वार्डन और गार्ड 24 घंटे रहते हैं इसका पूरा रेकॉर्ड मेंटेन किया जाता है। शहर में रेजिडेंस में जो पीजी हैं. उनके कोई मापदंड नहीं हैं। इस पर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
-संदीप सिंह, उपाध्यक्ष, जयपुर हॉस्टल यूनियन
Updated on:
22 Feb 2025 09:57 am
Published on:
22 Feb 2025 09:54 am

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