
जयपुर। राजस्थान के लगातार अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ( Rajasthan Government ) कठोर कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में अब किरायेदारों का पुलिस सत्यापन ( tenant verification ) करवाना जरूरी होगा। सत्यापन ( Police Verification Of Tenants ) में लापरहवाही बरतनें पर मकान मालिक ( Landloard ) पर कार्यवाही होगी।
गौरतलब है कि नौकरों और किरायेदारों का वेरिफिकेशन ( Servant and Tenant Verification ) न किए जाने के कारण प्रदेश में अक्सर बड़ी आपराधिक घटनाएं ( criminal incidents ) होती रहती हैं। अन्य राज्यों से अपराधी प्रवृति के लोग प्रदेश में आकर चोरी, डकैती, बलात्कार ( rape in rajasthan ) जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। ऐसे में वे अपराध को अंजाम देने के लिए किरायेदार बनकर रहते हैं और अपराध का षड्यंत्र रच वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस के रिकॉर्ड में ऐसे लोगों की जानकारी पहले से ही मौजूद रहे तो अपराधी की पहचान करना आसान हो जाएगा। यही कारण है कि किरायेदारों का पुलिस सत्यापन करवाना जरूरी है। सरकार के इस कदम से अपराधों में कहीं न कहीं कमी आ सकती है।
संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ( Shanti Dhariwal ) ने सोमवार को विधानसभा में इस मुद्दे पर कहा कि ऐसे मकान मालिक जो किरोयदारों की सूचना उपलब्ध नहीं करवाते है, उनके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
प्रदेश में कई जगह रिहायशी मकान मालिकों द्वारा मकान को पारियों में किराये पर दिये जाने एवं अवैध रूप से सबलेटिंग किये जाते हैं। अब मकान मालिकों के साथ वहां रह रहे किरायेदारों का संबंधित थानों द्वारा सत्यापन किया जा कर रिकॉर्ड देना जरुरी है।
मंत्री धारीवाल ने बताया कि समय-समय पर संबंधित थानों ( police station ) द्वारा किरायेदाराें की तस्दीक की जाती है। किरायेदारों की संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने एवं सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए थानों द्वारा सादा वस्त्रों में जाप्ता भी नियोजित किया जाता है।
बता दें कि राजस्थान में किरायेदारों की सूचना एकत्रित करने के लिए बीट प्रणाली प्रचलित है। इसके तहत बीट अधिकारी द्वारा किरायेदारों तथा घरेलू सहायकों की जानकारी लेने के लिए डोर-टू-डोर सर्वे भी करवाया जाता है।
Published on:
15 Jul 2019 06:48 pm
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