दिल्ली में सरकार ने उबर, ओला और रैपिडो आदि कम्पनियों की बाइक टैक्सी सर्विस बैन कर दी है। जयपुर में बड़ी संख्या में उबर, ओला सहित अन्य कम्पनियों की बाइक टैक्सी चल रही हैं। नियमों को ताक पर रख इनका संचालन किया जा रहा है। दरअसल, बाइक टैक्सी के लिए वाहन का व्यावसायिक पंजीयन जरूरी है। जबकि शहर में अधिकांश चालक निजी दुपहिया वाहन से ही बाइक टैक्सी चला रहे हैं। हालांकि, कुछ चालकों ने आरटीओ में अपने वाहन का कॉमर्शियल पंजीयन करवा रखा है।
दिल्ली में सरकार ने उबर, ओला और रैपिडो आदि कम्पनियों की बाइक टैक्सी सर्विस बैन कर दी है। जयपुर में बड़ी संख्या में उबर, ओला सहित अन्य कम्पनियों की बाइक टैक्सी चल रही हैं। नियमों को ताक पर रख इनका संचालन किया जा रहा है। दरअसल, बाइक टैक्सी के लिए वाहन का व्यावसायिक पंजीयन जरूरी है। जबकि शहर में अधिकांश चालक निजी दुपहिया वाहन से ही बाइक टैक्सी चला रहे हैं। हालांकि, कुछ चालकों ने आरटीओ में अपने वाहन का कॉमर्शियल पंजीयन करवा रखा है।
राज्य में बाइक टैक्सी के व्यावसायिक पंजीयन की यह प्रक्रिया
परिवहन विभाग ने राज्य में बाइक टैक्सी के व्यावसायिक पंजीयन की प्रक्रिया तय कर रखी है। जिसके अन्तर्गत अन्य कैब या टैक्सी की तरह बाइक टैक्सी को भी परमिट जारी किया जाता है। चालक को परमिट के लिए आरटीओ में आवेदन करना होता है। करीब दो हजार रुपए शुल्क लेकर परमिट जारी किया जाता है। इसके बाद उसे व्यावसायिक मानते हुए नया नंबर जारी किया जाता है। वाहन पर पीली नंबर प्लेट लगाई जाती है।
दिल्ली में इसलिए किया बैन
दिल्ली के परिवहन विभाग ने ऑनलाइन कैब कम्पनियों को नोटिस देकर बाइक टैक्सी का संचालन बैन किया है। जिसके अनुसार निजी नंबर वाले दुपहिया वाहनों का इस्तेमाल किराए पर यात्रियों को ले जाने के लिए किया जा रहा है। जबकि यह कॉमर्शियल ऑपरेशन है और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का उल्लंघन है। कैब कम्पनियां यदि यह सेवा जारी रखती हैं उन पर करीब एक लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं ड्राइवर पर 5 हजार का जुर्माना व लाइसेंस निलम्बित किया जाएगा।
खास-खास
जिम्मेदारी इनकी
- व्यावसायिक पंजीयन पर ही बाइक टैक्सी का संचालन करवाने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार निजी वाहन पर बाइक टैक्सी का संचालन करना नियमानुसार गलत है। इस पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।
- ऑनलाइन कैब कम्पनियां निजी वाहनों का पंजीयन अपनी कम्पनी में कर रही हैं, यह भी गलत है। आरटीओ से पहले जिम्मेदारी इन्हीं कम्पनियों की हैं। वे निजी वाहनों को रजिस्टर ही नहीं करें।