
Psoriasis
Psoriasis: जयपुर . सोरायसिस की समय पर पहचान कर ली जाए तो उससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। सबसे आम धारणा यह है कि सोरायसिस केवल 'त्वचा का रोग' है, जिसमें त्वचा पर खुजलीदार और सिल्वर रंग की पपड़ी वाले लाल दाग उभर आते हैं और अक्सर इसे संक्रामक मान लिया जाता है। यह एक सामान्य चकत्ते जैसी हो सकती है। सोरायसिस के चार में से लगभग एक रोगी को सोरियाटिक आर्थराइटिस होता है।
सोरायसिस पीडि़त मरीजों को जागरुक करते हुए डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. बृजेस नायर ने बताया कि सोरायसिस तब होता है जब शरीर का इम्युन सिस्टम अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करता है। इसके कारण त्वचा की नई कोशिकाएं तेजी से बनती हैं, जिससे सूखे दाग दिखाई देते हैं, क्योंकि यह कोशिकाएं त्वचा की सतह पर जमा हो जाती हैं। सोरायसिस के प्रति जागरुकता लाने के लिए साल में एक दिन 29 अक्टूबर को वल्र्ड सोरायसिस डे भी मनाया जाता है।
कई डर्मेटोलॉजिस्ट्स के अनुसार मामूली से लेकर गंभीर सोरायसिस से पीडि़त लोगों को उच्च गुणवत्ता के उपचार और इस बीमारी की नियमित जांच की जरूरत होती है। हो सकता है कि सिर की त्वचा, जननांग और पल्मोप्लांटर (यह हथेली और पैरों के तलुवे को प्रभावित करता है) में जलन से कोई सामान्य फिजिशियन इस रोग का आकलन न कर सके। डॉ. बृजेस नायर ने कहा कि सोरायसिस का कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन बायोलॉजिक्स जैसे उन्नत उपचार विकल्प इस रोग से पीडि़त कई लोगों के लिए क्रांतिकारी साबित हुए हैं। यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि उपचार के अनियमित होने से सोरियाटिक आर्थराइटिस, कार्डियोवैस्कुलर रोग, यूवेइटिस आदि होने की संभावना बढ़ सकती है। सोरायसिस के चार में से लगभग एक रोगी को सोरियाटिक आर्थराइटिस होता है।
कोविड-19 के चलते आई परेशानी -
कोविड के आने के बाद यह माना गया कि सोरायसिस जैसे स्व-प्रतिरक्षित रोग वाले लोग कोविड-19 के संक्रमण को लेकर ज्यादा संवेदनशील होंगे। इससे उपचार के अनुमान पर कई सवाल खड़े हुए और डर्मेटोलॉजिस्ट्स तक सीमित पहुँच के कारण कई रोगियों को अपना उपचार रोकना पड़ा।
Published on:
21 Oct 2020 08:36 pm

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