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बिजली कटौती और महंगी बिजली में आगे निकला राजस्थान

बिजली कटौती में उत्तर भारत के राज्यों से आगे निकल रहा

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बिजली कटौती और महंगी बिजली में आगे निकला राजस्थान

बिजली कटौती और महंगी बिजली में आगे निकला राजस्थान

जयपुर। बिजली कटौती में राजस्थान इस बार उत्तर भारत में दूसरे राज्यों से आगे निकल गया है। उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से ज्यादा यहां घोषित कटौती की जा रही है। जबकि, पहले उत्तर प्रदेश इसमें अव्वल रहता आया है लेकिन राजस्थान में बिजली संकट के बीच यूपी से ही अतिरिक्त बिजली मिल रही है।

ऐसे हालात के बीच बिजली दर (सरचार्ज, सेस सहित) मामले में प्रदेश चौथे पायदान पर है। घरेलू श्रेणी की बिजली दर में महाराष्ट्र, बिहारी और मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान का नम्बर है। यहां सब्सिडी के बावजूद पांच सौ यूनिट तक बिजली उपभोग कर रहे घरेलू उपभोक्ता का हर माह का बिल 4190 रुपए (सब्सिडी रहित) तक है, जबकि पंजाब, दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा के शहरों में यह शुल्क 3300 से 3840 रुपए तक है। पत्रिका ने देश के 22 राज्यों के विद्युत टैरिफ का स्केन किया तो यह हालात सामने आए।

जनता से सालाना 1770 करोड़ की अतिरिक्त ले रहे
खास यह है कि उत्पादन और वितरण लागत के बाद भी सेस, उपकर, फ्यूल सरचार्ज व अन्य तरीकों से जनता की जेब से सालाना 1770 करोड़ की अतिरिक्त वसूली की जा रही है। इसके अलावा अडानी पावर को चुका गए 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बोझ भी बिल में जोड़कर भेजा जा रहा है। हालांकि, डिस्कॉम प्रशासन दूसरे राज्यों की तुलना में यहां स्थितियां अलग होने और सब्सिडी रोकड़ ज्यादा देने का तर्क दे रहे हैं।


बिजली दर : देश में राजस्थान

1. घरेलू श्रेणी

महाराष्ट्र- 11.26
बिहार- 8.87
केरल- 8.70
मध्यप्रदेश- 8.20
राजस्थान- 8.13


2. कॉमर्शियल श्रेणी
उत्तरप्रदेश- 12.79
महाराष्ट्र- 11.60
दिल्ली- 11.54
कर्नाटक- 11.10
मध्यप्रदेश- 10.20
केरल- 9.88
राजस्थान- 9.68


3. कृषि टैरिफ
बिहार- 6.54
मध्यप्रदेश- 6.51
आसाम- 6.49
पंजाब- 6.38
छत्तीसगढ़- 6.27
राजस्थान- 5.95
(दर प्रति यूनिट में है। इसमें सब्सिडी राशि शामिल नहीं है)


औद्योगिक-कामर्शियल में हम

1. लघु व मध्यम औद्योगिक श्रेणी : इसमें पांचवें नम्बर प्रदेश है।
2. वृहद औद्योगिक श्रेणी : यहां 8.44 रुपए प्रति यूनिट दर है और प्रदेश सातवें पायदान पर है। पहले छह राज्यों में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल, कर्नाटक है।
(इसमें फ्यूल सरचार्ज, जल संरक्षण उपकर, अरबन सेस शामिल नहीं है)

टैरिफ के अलावा पांच तरह से बोझ

1. अरबन सेस : शहरी उपभोक्ता से 15 पैसे प्रति यूनिट। सालाना करीब 190 करोड़ रुपए ले रहे
2. इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी: सभी उपभोक्ताओं से 40 पैसे प्रति यूनिट। सालाना करीब 1350 करोड़ रुपए एकत्रित कर रहे हैं
3. जल संरक्षण उपकर : 10 पैसे प्रति यूनिट वसूल रहे। ग्रामीण उपभोक्ता इसमें शामिल नहीं। इससे सालाना करीब 230 करोड़ रुपए ले रहे हैं
4. फ्यूल सरचार्ज : हर तीन माह में सरचार्ज
5. अडानी भुगतान भार : करीब 10 हजार करोड़ रुपए चुकाने का भार 1.20 करोड़ उपभोक्ताओं पर डाला