
फाइल फोटो
Bal Panchayat : राजस्थान में कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव पर जहां रोक लगी हुई है। वहीं राजस्थान सरकार अब ग्राम पंचायतों में बालकों और युवाओं को राजनीति की सीख देने के लिए नई शुरुआत करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में बाल पंचायत का गठन करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव रवि जैन की ओर से आदेश जारी करने के बाद प्रदेश की सभी जिला परिषदें सक्रिय हो गई है। पंचायतीराज ढांचे को मजबूत बनाने व विकास की कार्यप्रणाली समझाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में दो साल के लिए किशोरों को पंच व सरपंच बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। इससे गांवों की सरकार के माध्यम से एक बेहतर लीडरशिप तैयार हो सकेगी। ऐसे में जल्द ही गांवों के बालक और युवा भी गांवों की सरकार में सहभागिता निभाते नजर आएंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत साथिन इन बच्चों के लिए प्रशिक्षक का कार्य करेगी। बाल संसद में 10 से 18 आयु वर्ग के बच्चे शामिल होंगे। हनुमानगढ़ जिले की सभी 268 ग्राम पंचायतों में बाल पंचायत गठन को लेकर जिला परिषद की टीम सक्रिय हो गई है।
बाल पंचायत सदस्यों को आगे विषयगत कार्य समूहों में गठित किया जाएगा। हर कार्य समूह को विभिन्न पोर्टफोलियों में से एक सौंपा जाएगा। इनमें स्वास्थ्य, भोजन व पोषण, शिक्षा एवं कौशल विकास, जल व स्वच्छता, बाल संरक्षण, सामाजिक न्याय और खेल व सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। ग्राम पंचायत को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाल पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को महिला सभा और ग्राम सभा में आमंत्रित किया जाए। यहां पर प्रत्येक समूह में किशोर व किशोरियों की संया बराबर होगी। बाल पंचायत का कार्यकाल दो वर्ष का होगा।
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बाल पंचायत में शामिल युवाओं के कुछ दायित्व निर्धारित किए हैं। इसमें वह ग्र्राम पंचायत विकास योजना में बजट के साथ-साथ बाल-केंद्रित गतिविधियों को शामिल करेंगे। बाल अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए समय-समय पर खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए जाएंगे। त्रैमासिक बाल सभा की सुविधा प्रदान करेंगे। बाल सभा में लिए गए प्रस्तावों को ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को प्रस्तुत करने का काम करेंगे।
बाल पंचायत गठन के दौरान राजस्व ग्राम के सभी वार्डों का समान प्रतिनिधित्व होगा। प्रत्येक बाल समूह में लड़के और लड़कियों की संया समान होगी। अर्थात बाल समूह के कम से कम आधे सदस्य लड़कियां होंगी। पहली बैठक में, प्रत्येक बाल समूह प्रत्येक वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले दो बच्चों (1 लड़का और 1 लड़की) को बाल पंचायत के सदस्यों के रूप में चुनेगा और नामांकित करेगा। जो ग्राम पंचायत स्तर पर गठित किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी राजस्व गांव में तीन वार्ड हैं तो बाल समूह छह बच्चों (तीन लड़के और तीन लड़कियों) को बाल पंचायत के सदस्य के रूप में नामांकित करेगा।
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जिला परिषद हनुमानगढ़ एसीईओ सुनील छाबड़ा ने बताया कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों में बाल पंचायत के गठन को लेकर आदेश प्राप्त हुए हैं। इसकी पालना में सभी बीडीओ को अवगत करवा दिया गया है। बाल पंचायत का गठन कैसे करना है, इस संबंध में विस्तृत निर्देश भी सभी पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को भेज दी गई है।
बाल पंचायतों के माध्यम से दो वर्ष तक पंच व सरपंच की भूमिका निभा कर ग्रामीण युवक व युवतियां आने वाले समय में बेहतर राजनेता के रूप में उभर सकते हैं। बाल पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व अन्य सदस्य ग्राम सभाओं के साथ ही पंचायत की सभी गतिविधियों में सक्रिय रहकर भाग ले सकेंगे। इससे उन्हें पता चल सकेगा कि गांवों की सरकार के कौन-कौन से कार्य होते हैं। एक पंच व सरपंच के अधिकार क्षेत्र में क्या आता है। वह गांवों में कौन से कार्य करवा कर बेहतर विकास कर सकते हैं।
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Updated on:
06 Sept 2024 03:14 pm
Published on:
06 Sept 2024 03:09 pm
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