
फिर 'भड़के' Ex-CM अशोक गहलोत, CM बिस्वा से लेकर PM मोदी तक को लिया निशाने पर
[typography_font:14pt]'बचाव' में दिए कई तर्क
इस मामले की सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राज दीपक रस्तोगी न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने दोनों डिप्टी सीएम के शपथ ग्रहण को वैध बताने के लिए कई तर्क दिए। उन्होंने इस याचिका को दुर्भावना से प्रेरित होना बताते हुए कहा कि संविधान में जो शपथ का प्रपत्र दिया गया है उसकी पूर्ण पालना हुई है। लेकिन केवल मात्र उपमुख्यमंत्री लिखने से शपथ अवैध नहीं होती है।
[typography_font:14pt]रस्तोगी ने अपने तर्कों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालय के न्यायिक दृष्टांत भी प्रस्तुत किए। इन तर्कों से सहमत होकर और न्यायिक दृष्टांत को अपने निर्णय में समाहित करते हुए कोर्ट ने संबंधित रिट याचिका को ख़ारिज कर दिया। साथ ही तल्ख़ टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि आजकल जनहित याचिकाओं का बहुत अधिक दुरूपयोग हो रहा है और वर्तमान मामला भी इसी श्रेणी में आता है।
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याचिकाकर्ता पर 25 हज़ार का हर्ज़ाना
[typography_font:14pt;" >कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ओम प्रकाश सोलंकी भी मौजूद रहे। कोर्ट ने उनकी रिट याचिका खारिज करते हुए उनपर ही ₹25 हज़ार का हर्ज़ाना लगा दिया।
Published on:
24 Jan 2024 11:57 am

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